पंचांग — 14 सितंबर 2027
भारत · IST · लाहिरी अयनांश · हैदराबाद संदर्भ
संक्षेप में
14 सितंबर 2027 को (भारत, IST), तिथि शुक्ल पक्ष चतुर्दशी; नक्षत्र धनिष्ठा; राहु काल 3:16 PM – 4:48 PM; अभिजित मुहूर्त 11:47 AM – 12:36 PM।
14 सितंबर 2027 का पंचांग एक नज़र में
| तिथि | शुक्ल पक्ष चतुर्दशी |
|---|---|
| नक्षत्र | धनिष्ठा |
| योग | सुकर्मा |
| करण | गर |
| वार | मंगलवार |
| राहु काल | 3:16 PM – 4:48 PM |
| अभिजित मुहूर्त | 11:47 AM – 12:36 PM |
| सूर्योदय | 6:02 AM |
| सूर्यास्त | 6:20 PM |
राहु काल
3:16 PM – 4:48 PM
नया या शुभ काम शुरू करने से बचें
अभिजित मुहूर्त
11:47 AM – 12:36 PM
शुभ मुहूर्त — महत्वपूर्ण कार्य के लिए उत्तम
मंगलवार
शुक्ल पक्ष चतुर्दशी
2:48 AM, Sep 15 तक, फिर पूर्णिमा
14 सितंबर 2027
शुभ मुहूर्त
प्रातःपूर्व — जप, अध्ययन, ध्यान
किसी भी शुभ आरंभ के लिए मध्याह्न विकल्प
यात्रा आरंभ के लिए शुभ
सूर्यास्त के आसपास गोधूलि
प्रातः संध्या
सायं संध्या
अशुभ मुहूर्त
नए कार्य, सौदे और यात्रा से बचें
दिन का अशुभ आठवाँ भाग
नए कार्यों के लिए सामान्यतः टाला जाता है
दिनमान के अशुभ मुहूर्त
सूर्य एवं चंद्र
दिनमान 12h 17m
पंच अंग
इस सूर्योदय-से-सूर्योदय दिन के लिए तिथि, नक्षत्र, योग, करण एवं वार।
कैलेंडर संदर्भ
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- सूर्य राशि
- सिंह
- चंद्र राशि
- कुंभ
- अयन
- दक्षिणायन
- मध्याह्न
- 12:11 PM
आध्यात्मिक महत्व
मंगलवार पारंपरिक रूप से भगवान हनुमान और भगवान सुब्रह्मण्य से संबंधित है।
चतुर्दशी अक्सर पूर्णिमा या अमावस्या से पहले आती है; मासिक शिवरात्रि कृष्ण चतुर्दशी को पड़ती है।
भक्तजन घी का दीपक जलाकर अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार प्रार्थना कर सकते हैं।
आज के मंत्र
-
Manojavam Maruta-tulya-vegam...हनुमान · 11 बार
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Om Saravanabhavaya Namahसुब्रह्मण्य · 108 बार
How this is calculated
Timings are computed with the Drik (observational) method using the Lahiri (Chitra-paksha) ayanamsha, for India (IST) with Hyderabad as the reference location. Sunrise- and sunset-based windows — Rahu Kalam, Choghadiya and the muhurtas — are derived from the day's actual sunrise and sunset, so they shift a few minutes by city.
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आज के त्योहार
आगामी त्योहार
- Bhadrapada Purnima Vrat 15 सितंबर
- Purnima Shraddha Tithi before Pitru Paksha 15 सितंबर
- Bhadrapada Purnima Vrat 15 सितंबर
- Pratipada Shraddha Tithi during Pitru Paksha 16 सितंबर
- Dwitiya Shraddha Tithi during Pitru Paksha 17 सितंबर
- Vighnaraja Sankashti Chaturthi 18 सितंबर
- Tritiya Shraddha Tithi during Pitru Paksha 18 सितंबर
- Bharani Shraddha during Pitru Paksha 18 सितंबर
पंचांग कैसे पढ़ें
पंचांग किसी स्थान और तिथि के लिए वैदिक घड़ी है। पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से (लाहिरी अयनांश) गणना किए जाते हैं। त्योहार की तिथियाँ तिथि से चलती हैं; नामकरण और कई संकल्पों में पाँचों अंग बोले जाते हैं।
राहु काल और अभिजित जैसे मुहूर्त स्थानीय सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच से काटे जाते हैं, इसलिए ये शहर के अनुसार कुछ मिनट बदलते हैं। इस पृष्ठ पर हैदराबाद, भारत (IST) संदर्भ है। तिथि और नक्षत्र के समाप्ति-समय खगोलीय हैं और पूरे देश में लगभग समान रहते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या 14 सितंबर 2027 (14 सितंबर 2027) शुभ दिन है?
14 सितंबर 2027 को तिथि शुक्ल पक्ष चतुर्दशी; नक्षत्र धनिष्ठा; राहु काल (अशुभ) 3:16 PM – 4:48 PM; शुभ अभिजित मुहूर्त लगभग 11:47 AM – 12:36 PM। नए आरंभ के लिए शुभ अवधियों (अभिजित, अमृत काल, ब्रह्म मुहूर्त) को चुनें और राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल से बचें।
14 सितंबर 2027 तिथि क्या है?
14 सितंबर 2027 तिथि शुक्ल पक्ष चतुर्दशी है (हिन्दू चंद्र दिवस, हैदराबाद/IST संदर्भ)।
14 सितंबर 2027 कौन सा नक्षत्र है?
14 सितंबर 2027 नक्षत्र (तारा) धनिष्ठा है।
14 सितंबर 2027 राहु काल कब है?
14 सितंबर 2027 राहु काल 3:16 PM – 4:48 PM है (IST, हैदराबाद संदर्भ)। इस अवधि में यात्रा, अनुबंध या शुभ संस्कार आरंभ करने से बचें।
पंचांग क्या है?
पंचांग वैदिक पंचांग (कैलेंडर) है। "पंच-अंग" का अर्थ है पाँच अंग: तिथि (चंद्र दिवस), वार (दिन), नक्षत्र, योग और करण। ये मिलकर पूजा, व्रत और मुहूर्त-चयन के लिए दिन की गुणवत्ता बताते हैं।
आज के पाँच अंग कैसे पढ़ें?
पहले तिथि और नक्षत्र देखें — अधिकांश व्रत-त्योहार चंद्र तिथि से और नामकरण/यात्रा की परंपराएँ नक्षत्र से चलती हैं। फिर योग और करण (आधी तिथि) देखें। विष्टि करण, जिसे भद्रा कहते हैं, नए आरंभ के लिए टाला जाता है। वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है।
सूर्योदय और राहु काल शहर के अनुसार क्यों बदलते हैं?
पंचांग का समय किसी भौगोलिक स्थान के लिए गणना किया जाता है। इस पृष्ठ पर हैदराबाद (भारत, IST) संदर्भ है। सूर्योदय, सूर्यास्त और दिन का आठ-भाग विभाजन (राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, अभिजित) पूरे भारत में कुछ मिनट बदलते हैं; तिथि और नक्षत्र के समाप्ति-समय खगोलीय हैं और लगभग समान रहते हैं।
राहु काल क्या है?
राहु काल प्रतिदिन का लगभग 90 मिनट का अशुभ समय है, जो वार के अनुसार दिनमान के अलग-अलग आठवें भाग में पड़ता है। यात्रा, अनुबंध या शुभ संस्कार आरंभ करने के लिए इसे टाला जाता है; पहले से चल रही नित्य पूजा रोकने की आवश्यकता नहीं।
अभिजित मुहूर्त क्या है?
अभिजित दिनमान का आठवाँ मुहूर्त है, लगभग स्थानीय दोपहर के आसपास। इसे स्वभाव से शुभ माना जाता है और महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करने के लिए, जब कोई अन्य शुभ मुहूर्त उपलब्ध न हो, सामान्य विकल्प के रूप में लिया जाता है।