Saraswati Stotram — अर्थ सहित संपूर्ण पाठ
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Saraswati Stotram एक भक्ति स्तोत्र है जो देवी सरस्वती को समर्पित है और इसका मुख्य उद्देश्य विद्या और बुद्धिमत्ता की प्राप्ति है। इस स्तोत्र का जाप करने से भक्तों को ज्ञान और रचनात्मकता में वृद्धि होती है।
- Hymn
- Saraswati Stotram
- Deity
- Goddess Saraswati
- Number of verses
- 6
- Available languages
- English, Telugu, Hindi
- Last updated
- 18 Jul 2026
Play along to learn the correct pronunciation and rhythm.
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Saraswati Stotram के संपूर्ण बोल
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या कुंदेंदु तुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदंडमंडितकरा या श्वेतपद्मासना ।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैस्सदा पूजिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निश्शेषजाड्यापहा ॥ 1 ॥
दोर्भिर्युक्ता चतुर्भिः स्फटिकमणिनिभै रक्षमालांदधाना
हस्तेनैकेन पद्मं सितमपिच शुकं पुस्तकं चापरेण ।
भासा कुंदेंदुशंखस्फटिकमणिनिभा भासमानाzसमाना
सा मे वाग्देवतेयं निवसतु वदने सर्वदा सुप्रसन्ना
3-6
सुरासुरैस्सेवितपादपंकजा करे विराजत्कमनीयपुस्तका ।
विरिंचिपत्नी कमलासनस्थिता सरस्वती नृत्यतु वाचि मे सदा ॥ 3 ॥
सरस्वती सरसिजकेसरप्रभा तपस्विनी सितकमलासनप्रिया ।
घनस्तनी कमलविलोललोचना मनस्विनी भवतु वरप्रसादिनी ॥ 4 ॥
सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि ।
विद्यारंभं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा ॥ 5 ॥
सरस्वति नमस्तुभ्यं सर्वदेवि नमो नमः ।
शांतरूपे शशिधरे सर्वयोगे नमो नमः
7 -10
नित्यानंदे निराधारे निष्कलायै नमो नमः ।
विद्याधरे विशालाक्षि शुद्धज्ञाने नमो नमः ॥ 7 ॥
शुद्धस्फटिकरूपायै सूक्ष्मरूपे नमो नमः ।
शब्दब्रह्मि चतुर्हस्ते सर्वसिद्ध्यै नमो नमः ॥ 8 ॥
मुक्तालंकृत सर्वांग्यै मूलाधारे नमो नमः ।
मूलमंत्रस्वरूपायै मूलशक्त्यै नमो नमः ॥ 9 ॥
मनोन्मनि महाभोगे वागीश्वरि नमो नमः ।
वाग्म्यै वरदहस्तायै वरदायै नमो नमः
11-14
वेदायै वेदरूपायै वेदांतायै नमो नमः ।
गुणदोषविवर्जिन्यै गुणदीप्त्यै नमो नमः ॥ 11 ॥
सर्वज्ञाने सदानंदे सर्वरूपे नमो नमः ।
संपन्नायै कुमार्यै च सर्वज्ञे ते नमो नमः ॥ 12 ॥
योगानार्य उमादेव्यै योगानंदे नमो नमः ।
दिव्यज्ञान त्रिनेत्रायै दिव्यमूर्त्यै नमो नमः ॥ 13 ॥
अर्धचंद्रजटाधारि चंद्रबिंबे नमो नमः ।
चंद्रादित्यजटाधारि चंद्रबिंबे नमो नमः
15-18
अणुरूपे महारूपे विश्वरूपे नमो नमः ।
अणिमाद्यष्टसिद्धायै आनंदायै नमो नमः ॥ 15 ॥
ज्ञान विज्ञान रूपायै ज्ञानमूर्ते नमो नमः ।
नानाशास्त्र स्वरूपायै नानारूपे नमो नमः ॥ 16 ॥
पद्मजा पद्मवंशा च पद्मरूपे नमो नमः ।
परमेष्ठ्यै परामूर्त्यै नमस्ते पापनाशिनी ॥ 17 ॥
महादेव्यै महाकाल्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ।
ब्रह्मविष्णुशिवायै च ब्रह्मनार्यै नमो नमः
19-21
कमलाकरपुष्पा च कामरूपे नमो नमः ।
कपालिकर्मदीप्तायै कर्मदायै नमो नमः ॥ 19 ॥
सायं प्रातः पठेन्नित्यं षण्मासात्सिद्धिरुच्यते ।
चोरव्याघ्रभयं नास्ति पठतां शृण्वतामपि ॥ 20 ॥
इत्थं सरस्वती स्तोत्रमगस्त्यमुनि वाचकम् ।
सर्वसिद्धिकरं नॄणां सर्वपापप्रणाशनम्
📄 Download PDF — Saraswati Stotram
Saraswati Stotram का अर्थ क्या है?
Saraswati Stotram का जाप करने से भक्तों को विद्या, संगीत और कला में सिद्धि प्राप्त होती है। देवी सरस्वती को ज्ञान की देवी माना जाता है, और इस स्तोत्र का पाठ करने से मानसिक शांति और समझ में वृद्धि होती है। यह विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।
Saraswati Stotram की रचना किसने की और यह कहाँ से आई है?
Saraswati Stotram का रचनाकार अज्ञात है, लेकिन यह मुख्य रूप से हिंदू परंपराओं में पाया जाता है। यह संस्कृत भाषा में लिखा गया है और प्राचीन ग्रंथों में इसका उल्लेख मिलता है।
Saraswati Stotram का जाप कब और कैसे करें?
Saraswati Stotram का जाप प्रातःकाल करना शुभ माना जाता है, विशेषकर वसंत पंचमी के दिन। इसे 11 या 108 बार जपना उत्तम है। जाप करते समय ध्यान एकाग्र रखें और स्पष्ट उच्चारण करें। बैठकर जाप करना और देवी सरस्वती की तस्वीर के सामने करना आदर्श होता है।
❤️ Saraswati Stotram के जाप से क्या लाभ होते हैं?
- ✓ ज्ञान और विद्या की प्राप्ति
- ✓ बुद्धिमत्ता में वृद्धि
- ✓ रचनात्मकता का विकास
- ✓ विद्यार्थियों के लिए विशेष लाभकारी
- ✓ मानसिक शांति और स्थिरता
- ✓ संगीत और कला में सिद्धि