Shivashtakam — अर्थ सहित संपूर्ण पाठ
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शिवाष्टकम एक भक्ति स्तोत्र है जो भगवान शिव को समर्पित है और इसका मुख्य उद्देश्य भक्तों को शिव की कृपा प्राप्त करनी है।
- Hymn
- Shivashtakam
- Deity
- Lord Shiva
- Number of verses
- 5
- Best day to chant
- Monday
- Available languages
- English, Telugu, Hindi
- Last updated
- 18 Jul 2026
Play along to learn the correct pronunciation and rhythm.
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Shivashtakam के संपूर्ण बोल
📄 Download Hindi PDF1 - 2
प्रभुं प्राणनाथं विभुं विश्वनाथं
जगन्नाथ नाथं सदानन्द भाजाम् ।
भवद्भव्य भूतेश्वरं भूतनाथं
शिवं शंकरं शम्भु मीशानमीडे ॥ 1 ॥
गले रुंडमालं तनौ सर्पजालं
महाकाल कालं गणेशादि पालम् ।
जटाजूट गंगोत्तरंगैर्विशालं
शिवं शंकरं शम्भु मीशानमीडे
3 - 4
मुदामाकरं मण्डनं मण्डयन्तं
महा मण्डलं भस्म भूषाधरं तम् ।
अनादिं ह्यपारं महा मोहमारं
शिवं शंकरं शम्भु मीशानमीडे ॥ 3 ॥
वटाधो निवासं महाट्टाट्टहासं
महापाप नाशं सदा सुप्रकाशम् ।
गिरीशं गणेशं सुरेशं महेशं
शिवं शंकरं शम्भु मीशानमीडे
5 - 6
गिरीन्द्रात्मजा संगृहीतार्धदेहं
गिरौ संस्थितं सर्वदापन्न गेहम् ।
परब्रह्म ब्रह्मादिभिर्वन्द्यमानं
शिवं शंकरं शम्भु मीशानमीडे ॥ 5 ॥
कपालं त्रिशूलं कराभ्यां दधानं
पदाम्भोज नम्राय कामं ददानम् ।
बलीवर्दयानं सुराणां प्रधानं
शिवं शंकरं शम्भु मीशानमीडे
7 - 8
शरच्चन्द्र गात्रं गणानन्दपात्रं
त्रिनेत्रं पवित्रं धनेशस्य मित्रम् ।
अपर्णा कलत्रं सदा सच्चरित्रं
शिवं शंकरं शम्भु मीशानमीडे ॥ 7 ॥
हरं सर्पहारं चिता भूविहारं
भवं वेदसारं सदा निर्विकारम् ।
श्मशाने वसन्तं मनोजं दहन्तं
शिवं शंकरं शम्भु मीशानमीडे
9
स्वयं यः प्रभाते नरश्शूल पाणे
पठेत् स्तोत्ररत्नं त्विहप्राप्यरत्नम् ।
सुपुत्रं सुधान्यं सुमित्रं कलत्रं
विचित्रैः समाराध्य मोक्षं प्रयाति
📄 Download PDF — Shivashtakam
Shivashtakam का अर्थ क्या है?
शिवाष्टकम का जप भक्तों को भगवान शिव की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने में मदद करता है। यह शिव की महिमा का गान करते हुए भक्तों के मन को शांति और स्थिरता प्रदान करता है। शिवाष्टकम का पाठ करना आध्यात्मिक शुद्धि और आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। यह शिवभक्तों के लिए उनके भक्ति मार्ग पर एक प्रेरणा का स्रोत है।
Shivashtakam की रचना किसने की और यह कहाँ से आई है?
शिवाष्टकम का रचनाकार अज्ञात है, लेकिन यह संस्कृत भाषा में रचित एक प्राचीन स्तोत्र है। यह शैव परंपरा में अत्यधिक मान्य है और ऐतिहासिक रूप से इसे शिव भक्तों द्वारा गाया जाता है।
Shivashtakam का जाप कब और कैसे करें?
शिवाष्टकम का जप सोमवार को या शिवरात्रि के दिन विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। इसे प्रातःकाल में स्नान के बाद शांत वातावरण में ११ या २१ बार जपना चाहिए। उच्चारण स्पष्ट और श्रद्धापूर्वक होना चाहिए।
❤️ Shivashtakam के जाप से क्या लाभ होते हैं?
- ✓ भगवान शिव की कृपा प्राप्ति
- ✓ मन की शांति
- ✓ आध्यात्मिक उन्नति
- ✓ भय का नाश
- ✓ दैहिक और मानसिक स्वास्थ्य
- ✓ कर्मों का शुद्धिकरण