पंचांग — 11 नवंबर 2025

भारत · IST · लाहिरी अयनांश · हैदराबाद संदर्भ

10 नवंबर 11 नवंबर 12 नवंबर आज

संक्षेप में

11 नवंबर 2025 को (भारत, IST), तिथि कृष्ण पक्ष सप्तमी; नक्षत्र पुष्य; राहु काल 2:48 PM – 4:13 PM; अभिजित मुहूर्त 11:37 AM – 12:22 PM।

आज का पंचांग एक नज़र में

तिथि कृष्ण पक्ष सप्तमी
नक्षत्र पुष्य
योग शुभ
करण Vishti / Bhadra
वार मंगलवार
राहु काल 2:48 PM – 4:13 PM
अभिजित मुहूर्त 11:37 AM – 12:22 PM
सूर्योदय 6:22 AM
सूर्यास्त 5:37 PM

मंगलवार

कृष्ण पक्ष सप्तमी

11 नवंबर 2025

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त 4:46 AM – 5:34 AM

प्रातःपूर्व — जप, अध्ययन, ध्यान

अभिजित मुहूर्त 11:37 AM – 12:22 PM

किसी भी शुभ आरंभ के लिए मध्याह्न विकल्प

विजय मुहूर्त 1:52 PM – 2:37 PM

यात्रा आरंभ के लिए शुभ

गोधूलि मुहूर्त 5:37 PM – 6:01 PM

सूर्यास्त के आसपास गोधूलि

प्रातः संध्या 5:10 AM – 6:22 AM

प्रातः संध्या

सायं संध्या 5:37 PM – 6:49 PM

सायं संध्या

अशुभ मुहूर्त

राहु काल 2:48 PM – 4:13 PM

नए कार्य, सौदे और यात्रा से बचें

यमगण्ड 9:11 AM – 10:35 AM

दिन का अशुभ आठवाँ भाग

गुलिक काल 11:59 AM – 1:24 PM

नए कार्यों के लिए सामान्यतः टाला जाता है

दुर्मुहूर्त 11:37 AM – 12:22 PM; 1:52 PM – 2:37 PM

दिनमान के अशुभ मुहूर्त

सूर्य एवं चंद्र

सूर्योदय
6:22 AM
सूर्यास्त
5:37 PM
चंद्रोदय
11:35 PM
चंद्रास्त
12:04 PM

दिनमान 11h 14m

पंच अंग

इस सूर्योदय-से-सूर्योदय दिन के लिए तिथि, नक्षत्र, योग, करण एवं वार।

तिथि
कृष्ण पक्ष सप्तमी 11:09 PM तक
फिर अष्टमी
नक्षत्र
पुष्य 6:18 PM तक
फिर आश्लेषा
योग
शुभ 9:44 AM तक
फिर Sukla
करण
Vishti / Bhadra 11:32 AM तक
फिर बव
Vishti / Bhadra 11:32 AM तक → बव 11:09 PM तक → बालव 10:58 AM, Nov 12 तक
वार
मंगलवार
सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

कैलेंडर संदर्भ

पक्ष
कृष्ण पक्ष
मध्याह्न
11:59 AM

आध्यात्मिक महत्व

मंगलवार पारंपरिक रूप से भगवान हनुमान और भगवान सुब्रह्मण्य से संबंधित है।

पुष्य पोषण, दान और पवित्र कार्यों के लिए सर्वाधिक शुभ नक्षत्रों में है।

भक्तजन घी का दीपक जलाकर अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार प्रार्थना कर सकते हैं।

आज के मंत्र

  • Manojavam Maruta-tulya-vegam...
    हनुमान · 11 बार
  • Om Saravanabhavaya Namah
    सुब्रह्मण्य · 108 बार

How this is calculated

Timings are computed with the Drik (observational) method using the Lahiri (Chitra-paksha) ayanamsha, for India (IST) with Hyderabad as the reference location. Sunrise- and sunset-based windows — Rahu Kalam, Choghadiya and the muhurtas — are derived from the day's actual sunrise and sunset, so they shift a few minutes by city.

Reviewed by Thanuja, Astrologer (6+ yrs) Updated Sep 4, 2026, 7:00 PM IST Lahiri ayanamsha · Drik method · India/IST

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पंचांग कैसे पढ़ें

पंचांग किसी स्थान और तिथि के लिए वैदिक घड़ी है। पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से (लाहिरी अयनांश) गणना किए जाते हैं। त्योहार की तिथियाँ तिथि से चलती हैं; नामकरण और कई संकल्पों में पाँचों अंग बोले जाते हैं।

राहु काल और अभिजित जैसे मुहूर्त स्थानीय सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच से काटे जाते हैं, इसलिए ये शहर के अनुसार कुछ मिनट बदलते हैं। इस पृष्ठ पर हैदराबाद, भारत (IST) संदर्भ है। तिथि और नक्षत्र के समाप्ति-समय खगोलीय हैं और पूरे देश में लगभग समान रहते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या 11 नवंबर 2025 (11 नवंबर 2025) शुभ दिन है?

11 नवंबर 2025 को तिथि कृष्ण पक्ष सप्तमी; नक्षत्र पुष्य; राहु काल (अशुभ) 2:48 PM – 4:13 PM; शुभ अभिजित मुहूर्त लगभग 11:37 AM – 12:22 PM। नए आरंभ के लिए शुभ अवधियों (अभिजित, अमृत काल, ब्रह्म मुहूर्त) को चुनें और राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल से बचें।

11 नवंबर 2025 तिथि क्या है?

11 नवंबर 2025 को तिथि कृष्ण पक्ष सप्तमी है (हिन्दू चंद्र दिवस, हैदराबाद/IST संदर्भ)।

11 नवंबर 2025 कौन सा नक्षत्र है?

11 नवंबर 2025 को नक्षत्र (तारा) पुष्य है।

11 नवंबर 2025 राहु काल कब है?

11 नवंबर 2025 को राहु काल 2:48 PM – 4:13 PM है (IST, हैदराबाद संदर्भ)। इस अवधि में यात्रा, अनुबंध या शुभ संस्कार आरंभ करने से बचें।

पंचांग क्या है?

पंचांग वैदिक पंचांग (कैलेंडर) है। "पंच-अंग" का अर्थ है पाँच अंग: तिथि (चंद्र दिवस), वार (दिन), नक्षत्र, योग और करण। ये मिलकर पूजा, व्रत और मुहूर्त-चयन के लिए दिन की गुणवत्ता बताते हैं।

आज के पाँच अंग कैसे पढ़ें?

पहले तिथि और नक्षत्र देखें — अधिकांश व्रत-त्योहार चंद्र तिथि से और नामकरण/यात्रा की परंपराएँ नक्षत्र से चलती हैं। फिर योग और करण (आधी तिथि) देखें। विष्टि करण, जिसे भद्रा कहते हैं, नए आरंभ के लिए टाला जाता है। वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है।

सूर्योदय और राहु काल शहर के अनुसार क्यों बदलते हैं?

पंचांग का समय किसी भौगोलिक स्थान के लिए गणना किया जाता है। इस पृष्ठ पर हैदराबाद (भारत, IST) संदर्भ है। सूर्योदय, सूर्यास्त और दिन का आठ-भाग विभाजन (राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, अभिजित) पूरे भारत में कुछ मिनट बदलते हैं; तिथि और नक्षत्र के समाप्ति-समय खगोलीय हैं और लगभग समान रहते हैं।

राहु काल क्या है?

राहु काल प्रतिदिन का लगभग 90 मिनट का अशुभ समय है, जो वार के अनुसार दिनमान के अलग-अलग आठवें भाग में पड़ता है। यात्रा, अनुबंध या शुभ संस्कार आरंभ करने के लिए इसे टाला जाता है; पहले से चल रही नित्य पूजा रोकने की आवश्यकता नहीं।

अभिजित मुहूर्त क्या है?

अभिजित दिनमान का आठवाँ मुहूर्त है, लगभग स्थानीय दोपहर के आसपास। इसे स्वभाव से शुभ माना जाता है और महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करने के लिए, जब कोई अन्य शुभ मुहूर्त उपलब्ध न हो, सामान्य विकल्प के रूप में लिया जाता है।