संक्षेप में
19 मई 2027 को (भारत, IST), तिथि शुक्ल पक्ष चतुर्दशी; नक्षत्र स्वाति; राहु काल 12:12 PM – 1:50 PM; अभिजित मुहूर्त 11:46 AM – 12:38 PM।
19 मई 2027 का पंचांग एक नज़र में
| तिथि | शुक्ल पक्ष चतुर्दशी |
|---|---|
| नक्षत्र | स्वाति |
| योग | वरीयान |
| करण | वणिज |
| वार | बुधवार |
| राहु काल | 12:12 PM – 1:50 PM |
| अभिजित मुहूर्त | 11:46 AM – 12:38 PM |
| सूर्योदय | 5:41 AM |
| सूर्यास्त | 6:43 PM |
राहु काल
12:12 PM – 1:50 PM
नया या शुभ काम शुरू करने से बचें
अभिजित मुहूर्त
11:46 AM – 12:38 PM
शुभ मुहूर्त — महत्वपूर्ण कार्य के लिए उत्तम
बुधवार
शुक्ल पक्ष चतुर्दशी
4:03 PM तक, फिर पूर्णिमा
19 मई 2027
शुभ मुहूर्त
प्रातःपूर्व — जप, अध्ययन, ध्यान
किसी भी शुभ आरंभ के लिए मध्याह्न विकल्प
यात्रा आरंभ के लिए शुभ
सूर्यास्त के आसपास गोधूलि
प्रातः संध्या
सायं संध्या
अशुभ मुहूर्त
नए कार्य, सौदे और यात्रा से बचें
दिन का अशुभ आठवाँ भाग
नए कार्यों के लिए सामान्यतः टाला जाता है
दिनमान के अशुभ मुहूर्त
सूर्य एवं चंद्र
दिनमान 13h 1m
पंच अंग
इस सूर्योदय-से-सूर्योदय दिन के लिए तिथि, नक्षत्र, योग, करण एवं वार।
कैलेंडर संदर्भ
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- सूर्य राशि
- वृषभ
- चंद्र राशि
- तुला
- अयन
- उत्तरायण
- मध्याह्न
- 12:12 PM
आध्यात्मिक महत्व
बुधवार पारंपरिक रूप से भगवान कृष्ण और बुध से संबंधित है।
चतुर्दशी अक्सर पूर्णिमा या अमावस्या से पहले आती है; मासिक शिवरात्रि कृष्ण चतुर्दशी को पड़ती है।
भक्तजन घी का दीपक जलाकर अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार प्रार्थना कर सकते हैं।
आज के मंत्र
-
Om Sri Krishnaya Namahaकृष्ण · 108 बार
How this is calculated
Timings are computed with the Drik (observational) method using the Lahiri (Chitra-paksha) ayanamsha, for India (IST) with Hyderabad as the reference location. Sunrise- and sunset-based windows — Rahu Kalam, Choghadiya and the muhurtas — are derived from the day's actual sunrise and sunset, so they shift a few minutes by city.
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आज के त्योहार
आगामी त्योहार
- Adhika Jyeshtha Purnima 20 मई
- World No Tobacco Day WNTD 20 मई
- Jyeshtha Adhika Purnima 20 मई
- Vibhuvana Sankashti Chaturthi 23 मई
- World Environment Day Eco Day 25 मई
- Parama Ekadashi 31 मई
- Adhika Krishna Dwadashi 1 जून
- Mithuna Sankranti 4 जून
पंचांग कैसे पढ़ें
पंचांग किसी स्थान और तिथि के लिए वैदिक घड़ी है। पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से (लाहिरी अयनांश) गणना किए जाते हैं। त्योहार की तिथियाँ तिथि से चलती हैं; नामकरण और कई संकल्पों में पाँचों अंग बोले जाते हैं।
राहु काल और अभिजित जैसे मुहूर्त स्थानीय सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच से काटे जाते हैं, इसलिए ये शहर के अनुसार कुछ मिनट बदलते हैं। इस पृष्ठ पर हैदराबाद, भारत (IST) संदर्भ है। तिथि और नक्षत्र के समाप्ति-समय खगोलीय हैं और पूरे देश में लगभग समान रहते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या 19 मई 2027 (19 मई 2027) शुभ दिन है?
19 मई 2027 को तिथि शुक्ल पक्ष चतुर्दशी; नक्षत्र स्वाति; राहु काल (अशुभ) 12:12 PM – 1:50 PM; शुभ अभिजित मुहूर्त लगभग 11:46 AM – 12:38 PM। नए आरंभ के लिए शुभ अवधियों (अभिजित, अमृत काल, ब्रह्म मुहूर्त) को चुनें और राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल से बचें।
19 मई 2027 तिथि क्या है?
19 मई 2027 तिथि शुक्ल पक्ष चतुर्दशी है (हिन्दू चंद्र दिवस, हैदराबाद/IST संदर्भ)।
19 मई 2027 कौन सा नक्षत्र है?
19 मई 2027 नक्षत्र (तारा) स्वाति है।
19 मई 2027 राहु काल कब है?
19 मई 2027 राहु काल 12:12 PM – 1:50 PM है (IST, हैदराबाद संदर्भ)। इस अवधि में यात्रा, अनुबंध या शुभ संस्कार आरंभ करने से बचें।
पंचांग क्या है?
पंचांग वैदिक पंचांग (कैलेंडर) है। "पंच-अंग" का अर्थ है पाँच अंग: तिथि (चंद्र दिवस), वार (दिन), नक्षत्र, योग और करण। ये मिलकर पूजा, व्रत और मुहूर्त-चयन के लिए दिन की गुणवत्ता बताते हैं।
आज के पाँच अंग कैसे पढ़ें?
पहले तिथि और नक्षत्र देखें — अधिकांश व्रत-त्योहार चंद्र तिथि से और नामकरण/यात्रा की परंपराएँ नक्षत्र से चलती हैं। फिर योग और करण (आधी तिथि) देखें। विष्टि करण, जिसे भद्रा कहते हैं, नए आरंभ के लिए टाला जाता है। वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है।
सूर्योदय और राहु काल शहर के अनुसार क्यों बदलते हैं?
पंचांग का समय किसी भौगोलिक स्थान के लिए गणना किया जाता है। इस पृष्ठ पर हैदराबाद (भारत, IST) संदर्भ है। सूर्योदय, सूर्यास्त और दिन का आठ-भाग विभाजन (राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, अभिजित) पूरे भारत में कुछ मिनट बदलते हैं; तिथि और नक्षत्र के समाप्ति-समय खगोलीय हैं और लगभग समान रहते हैं।
राहु काल क्या है?
राहु काल प्रतिदिन का लगभग 90 मिनट का अशुभ समय है, जो वार के अनुसार दिनमान के अलग-अलग आठवें भाग में पड़ता है। यात्रा, अनुबंध या शुभ संस्कार आरंभ करने के लिए इसे टाला जाता है; पहले से चल रही नित्य पूजा रोकने की आवश्यकता नहीं।
अभिजित मुहूर्त क्या है?
अभिजित दिनमान का आठवाँ मुहूर्त है, लगभग स्थानीय दोपहर के आसपास। इसे स्वभाव से शुभ माना जाता है और महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करने के लिए, जब कोई अन्य शुभ मुहूर्त उपलब्ध न हो, सामान्य विकल्प के रूप में लिया जाता है।