Bhavani Ashtakam — अर्थ सहित संपूर्ण पाठ
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'भवानी अष्टकम' एक भक्ति स्तोत्र है जो देवी दुर्गा को समर्पित है और इसका मुख्य उद्देश्य भक्तों को मोक्ष और शांति प्रदान करना है।
- Hymn
- Bhavani Ashtakam
- Deity
- Goddess Durga
- Number of verses
- 4
- Best day to chant
- Friday
- Available languages
- English, Telugu, Hindi
- Last updated
- 18 Jul 2026
Play along to learn the correct pronunciation and rhythm.
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Bhavani Ashtakam के संपूर्ण बोल
📄 Download Hindi PDF1 - 2
न तातो न माता न बन्धुर्न दाता
न पुत्रो न पुत्री न भृत्यो न भर्ता |
न जाया न विद्या न वृत्तिर्ममैव
गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥ 1 ॥
भवाब्धावपारे महादुःखभीरु
पपात प्रकामि प्रलोभी प्रमत्तः |
कुसंसारपाशप्रबद्धः सदाहं
गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि
3 - 4
न जानामि दानं न च ध्यानयोगं
न जानामि तंत्रं न च स्तोत्रमंत्रम् |
न जानामि पूजां न च न्यासयोगं
गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥ 3 ॥
न जानामि पुण्यं न जानामि तीर्थं
न जानामि मुक्तिं लयं वा कदाचित् |
न जानामि भक्तिं व्रतं वापि मातः
गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि
5 - 6
कुकर्मी कुसंगी कुबुद्धिः कुदासः
कुलाचारहीनः कदाचारलीनः |
कुदृष्टिः कुवाक्यप्रबन्धः सदाहं
गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥ 5 ॥
प्रजेशं रमेशं महेशं सुरेशं
दिनेशं निशीथेश्वरं वा कदाचित् |
न जानामि चान्यत् सदाहं शरण्ये
गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि
7 - 8
विवादे विषादे प्रमादे प्रवासे
जले चानले पर्वते शत्रुमध्ये |
अरण्ये शरण्ये सदा मां प्रपाहि
गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥ 7 ॥
अनाथो दरिद्रो जरारोगयुक्तो
महाक्षीणदीनः सदा जाड्यवक्त्रः |
विपत्तौ प्रविष्टः प्रणष्टः सदाहं
गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि
📄 Download PDF — Bhavani Ashtakam
Bhavani Ashtakam का अर्थ क्या है?
भवानी अष्टकम का पाठ करना भक्तों के लिए आत्मसमर्पण और आंतरिक शांति प्राप्त करने का साधन है। यह देवी दुर्गा की महिमा का गुणगान करता है, जिससे भक्तों को साहस और आत्मबल मिलता है। भक्त इसे अपनी इच्छाओं की पूर्ति और दुर्गा माँ की कृपा पाने के लिए करते हैं। इस स्तोत्र का पाठ भक्तों को अपने जीवन में संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति कराता है।
Bhavani Ashtakam की रचना किसने की और यह कहाँ से आई है?
भवानी अष्टकम का रचयिता आदि शंकराचार्य को माना जाता है। यह स्तोत्र संस्कृत भाषा में रचित है और शंकराचार्य के भक्ति साहित्य का एक हिस्सा है। इसका ऐतिहासिक संदर्भ भारतीय भक्ति परंपरा में गहराई से जड़ा हुआ है।
Bhavani Ashtakam का जाप कब और कैसे करें?
भवानी अष्टकम का पाठ नवरात्रि के दौरान या विशेष रूप से शुक्रवार के दिन करना शुभ माना जाता है। इसे कम से कम तीन बार दोहराना चाहिए। पाठ के समय एक शांत और स्वच्छ स्थान पर बैठकर देवी का ध्यान करें। उच्चारण स्पष्ट और शुद्ध रखें।
❤️ Bhavani Ashtakam के जाप से क्या लाभ होते हैं?
- ✓ आत्मिक शांति की प्राप्ति
- ✓ दुर्गा माँ की कृपा
- ✓ आत्मबल में वृद्धि
- ✓ नकारात्मक ऊर्जा का नाश
- ✓ इच्छाओं की पूर्ति
- ✓ आध्यात्मिक उत्थान