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Kanakadhara Stotram — अर्थ सहित संपूर्ण पाठ

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Goddess Durga — devotional image

कनकधारा स्तोत्रम एक भक्ति स्तोत्र है जो देवी दुर्गा को समर्पित है और इसका मुख्य उद्देश्य धन और समृद्धि की प्राप्ति है।

Hymn
Kanakadhara Stotram
Deity
Goddess Durga
Number of verses
10
Best day to chant
Friday
Available languages
English, Telugu, Hindi
Last updated
18 Jul 2026
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Kanakadhara Stotram के संपूर्ण बोल

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1 - 2

अंगं हरेः पुलकभूषणमाश्रयंती
भृंगांगनेव मुकुलाभरणं तमालम् ।
अंगीकृताखिलविभूतिरपांगलीला
मांगल्यदास्तु मम मंगलदेवतायाः ॥ 1 ॥

मुग्धा मुहुर्विदधती वदने मुरारेः
प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि ।
माला दृशोर्मधुकरीव महोत्पले या
सा मे श्रियं दिशतु सागरसंभवायाः

3 - 4

आमीलिताक्षमधिगम्य मुदा मुकुंदम्-
आनंदकंदमनिमेषमनंगतंत्रम् ।
आकेकरस्थितकनीनिकपक्ष्मनेत्रं
भूत्यै भवेन्मम भुजंगशयांगनायाः ॥ 3 ॥

बाह्वंतरे मधुजितः श्रितकौस्तुभे या
हारावलीव हरिनीलमयी विभाति ।
कामप्रदा भगवतोऽपि कटाक्षमाला
कल्याणमावहतु मे कमलालयायाः

5 - 6

कालांबुदालिललितोरसि कैटभारेः
धाराधरे स्फुरति या तटिदंगनेव ।
मातुस्समस्तजगतां महनीयमूर्तिः
भद्राणि मे दिशतु भार्गवनंदनायाः ॥ 5 ॥

प्राप्तं पदं प्रथमतः खलु यत्प्रभावात्
मांगल्यभाजि मधुमाथिनि मन्मथेन ।
मय्यापतेत्तदिह मंथरमीक्षणार्धं
मंदालसं च मकरालयकन्यकायाः

7 - 8

विश्वामरेंद्रपदविभ्रमदानदक्षं
आनंदहेतुरधिकं मुरविद्विषोऽपि ।
ईषन्निषीदतु मयि क्षणमीक्षणार्थं
इंदीवरोदरसहोदरमिंदिरायाः ॥ 7 ॥

इष्टा विशिष्टमतयोऽपि यया दयार्द्र
दृष्ट्या त्रिविष्टपपदं सुलभं लभंते ।
दृष्टिः प्रहृष्ट कमलोदरदीप्तिरिष्टां
पुष्टिं कृषीष्ट मम पुष्करविष्टरायाः

9 - 10

दद्याद्दयानुपवनो द्रविणांबुधारा-
मस्मिन्न किंचन विहंगशिशौ विषण्णे ।
दुष्कर्मघर्ममपनीय चिराय दूरं
नारायणप्रणयिनीनयनांबुवाहः ॥ 9 ॥

गीर्देवतेति गरुडध्वजसुंदरीति
शाकंभरीति शशिशेखरवल्लभेति ।
सृष्टिस्थितिप्रलयकेलिषु संस्थितायै
तस्यै नमस्त्रिभुवनैकगुरोस्तरुण्यै

11 - 12

श्रुत्यै नमोऽस्तु शुभकर्मफलप्रसूत्यै
रत्यै नमोऽस्तु रमणीयगुणार्णवायै ।
शक्त्यै नमोऽस्तु शतपत्रनिकेतनायै
पुष्ट्यै नमोऽस्तु पुरुषोत्तमवल्लभायै ॥ 11 ॥

नमोऽस्तु नालीकनिभाननायै
नमोऽस्तु दुग्धोदधिजन्मभूम्यै ।
नमोऽस्तु सोमामृतसोदरायै
नमोऽस्तु नारायणवल्लभायै

13 - 14

नमोऽस्तु हेमांबुजपीठिकायै
नमोऽस्तु भूमंडलनायिकायै ।
नमोऽस्तु देवादिदयापरायै
नमोऽस्तु शारंगायुधवल्लभायै ॥ 13 ॥

नमोऽस्तु देव्यै भृगुनंदनायै
नमोऽस्तु विष्णोरुरसिस्थितायै ।
नमोऽस्तु लक्ष्म्यै कमलालयायै
नमोऽस्तु दामोदरवल्लभायै

15 - 16

नमोऽस्तु कांत्यै कमलेक्षणायै
नमोऽस्तु भूत्यै भुवनप्रसूत्यै ।
नमोऽस्तु देवादिभिरर्चितायै
नमोऽस्तु नंदात्मजवल्लभायै ॥ 15 ॥

संपत्कराणि सकलेंद्रियनंदनानि
साम्राज्यदानविभवानि सरोरुहाक्षि ।
त्वद्वंदनानि दुरितोद्धरणोद्यतानि
मामेव मातरनिशं कलयंतु मान्ये

17 - 18

यत्कटाक्षसमुपासनाविधिः
सेवकस्य सकलार्थसंपदः ।
संतनोति वचनांगमानसैः
त्वां मुरारिहृदयेश्वरीं भजे ॥ 17 ॥

सरसिजनिलये सरोजहस्ते [सरसिजनयनॆ]
धवलतमांशुकगंधमाल्यशोभे ।
भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे
त्रिभुवनभूतिकरि प्रसीद मह्यम्

19 - 21

दिग्घस्तिभिः कनककुंभमुखावसृष्ट
स्वर्वाहिनी विमलचारुजलप्लुतांगीम् ।
प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष
लोकाधिनाथ-गृहिणीम्-अमृताब्धिपुत्रीम् ॥ 19 ॥

कमले कमलाक्षवल्लभे त्वं
करुणापूरतरंगितैरपांगैः ।
अवलोकय मामकिंचनानां
प्रथमं पात्रमकृत्रिमं दयायाः ॥ 20 ॥

स्तुवंति ये स्तुतिभिरमूभिरन्वहं
त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम् ।
गुणाधिका गुरुतर-भाग्य-भागिनो [भागिनह्]
भवंति ते भुवि बुधभाविताशयाः

Kanakadhara Stotram – Lyrics, Meaning, Audio & PDF

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Kanakadhara Stotram का अर्थ क्या है?

कनकधारा स्तोत्रम का पाठ करने से भक्तों को देवी दुर्गा की कृपा और आर्थिक समृद्धि प्राप्त होती है। यह स्तोत्र विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो वित्तीय कठिनाइयों से जूझ रहे हैं। स्तोत्र का जाप व्यक्ति को मानसिक शांति और आध्यात्मिक विकास की ओर अग्रसर करता है। यह देवी दुर्गा की उपासना का एक शक्तिशाली माध्यम है।

Kanakadhara Stotram की रचना किसने की और यह कहाँ से आई है?

कनकधारा स्तोत्रम की रचना आदि शंकराचार्य ने की थी। यह मूलतः संस्कृत में लिखा गया था और हिंदू परंपरा में इसका महत्वपूर्ण स्थान है। इसका इतिहास अद्वितीय है और इसे विशेष रूप से देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के लिए जाना जाता है।

Kanakadhara Stotram का जाप कब और कैसे करें?

कनकधारा स्तोत्रम का जाप शुक्रवार को करना विशेष शुभ माना जाता है। इसे प्रातः काल या संध्या के समय 11 बार जाप करना चाहिए। जाप के समय साफ-सुथरे स्थान पर बैठें और स्पष्ट उच्चारण करें।

❤️ Kanakadhara Stotram के जाप से क्या लाभ होते हैं?

  • धन की प्राप्ति
  • आर्थिक समृद्धि
  • मानसिक शांति
  • आध्यात्मिक उन्नति
  • देवी दुर्गा की कृपा
  • वित्तीय समस्याओं का समाधान

Frequently Asked Questions