Krishna Chalisa — अर्थ सहित संपूर्ण पाठ
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कृष्ण चालीसा भगवान कृष्ण को समर्पित एक भक्ति स्तोत्र है जिसका मुख्य उद्देश्य भक्तों को भगवान कृष्ण के प्रति भक्ति और श्रद्धा जागृत करना है।
- Hymn
- Krishna Chalisa
- Deity
- Lord Krishna
- Number of verses
- 12
- Available languages
- English, Telugu, Hindi
- Last updated
- 18 Jul 2026
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Krishna Chalisa के संपूर्ण बोल
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बंशी शोभित कर मधुर ।
नील जलद तनु श्यामल ॥
अरुण अधर जनु बिंब फल ।
नयन कमल अभिराम ॥
पूर्णेन्दु अरविंद मुख ।
पीताम्बर शुभ सजल ॥
जय मनमोहन मदन छवि ।
कृष्णचन्द्र महाराज ॥
1 - 4
जय जय यदुनंदन जग वंदन ।
जय वसुदेव देवकी नंदन ॥1॥
जय यशोदा सुत नंद दुलारे ।
जय प्रभु भगतन के रखवारे ॥2॥
जय नटनागर नाग नथैया ।
कृष्ण कन्हैया धेनुं चरैया ॥3॥
पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धरो ।
आवो दीनन कष्ट निवारो
5 - 8
बंसी मधुर अधर धारी तेरी ।
होवे पूरण मनोरथ मेरी ॥5॥
आवो हरि पुनि माखन चाखो ।
आज लाज भगतन की राखो ॥6॥
गोल कपोल चिबुक अरुणारे ।
मृदुल मुस्कान मोहिनी धारे ॥7॥
राजित राजीव नयन विशाला ।
मोर मुकुट वैजयंतीमाला
9 - 12
कुंडल श्रवण पीत पट आछे ।
कटि किंकिणि काचन काछे ॥9॥
नील जलज सुंदर तन सोहे ।
छवि लखि सुर नर मुनि मन मोहे ॥10॥
मस्तक तिलक अलक घुंघराले ।
आवो श्याम बंसुरी वाले ॥11॥
करि पी पान पूतनहि तार्यो ।
अक बक कागासुर मार्यो
13 - 16
मधुवन जलत अगिनि जब ज्वाला ।
भये शीतल लखताहि नंदलाला ॥13॥
सुरपति जब ब्रज चढ़्यो रिसाई ।
मूसर धार बारि बरसाई ॥14॥
लागत लागत ब्रिज चह बहायो ।
गोवर्धन नख धरि बचायो ॥15॥
लखि यशोदा मन भ्रम अधिकाई ।
मुख मोह चौद भुवन दिखाई
17 - 20
दुष्ट कंस अति उद्धम मचायो ।
कोटि कमल कहा फूल मंगायो ॥17॥
नाथि कैयहि तब तुम लीन्हे ।
चरण चिन्ह दे निर्भय कीन्हे ॥18॥
करि गोपिन संग रास बिलासा ।
सब की पूरण करी अभिलाषा ॥19॥
केतिक महा असुर संहार्यो ।
कंसहि केश पकड़ि दीई मार्यो
21 - 24
मातु पिता की बंदि छुड़ाई ।
उग्रसेन कहं राज दिलाई ॥21॥
महि से मृतक चाहो सुत लायो ।
मातु देवकी शोक मिटायो ॥22॥
भौमासुर मुर दैत्य सहारी ।
लाये षट्दश सहस कुमारी ॥23॥
दीई भीनहि त्रिण चिरि सहारा ।
जरासिंधु राक्षस कहं मारा
25 - 28
असुर वृकासुर आदिक मार्यो ।
निज भगतन के तब कष्ट निवार्यो ॥25॥
दीन सुदामा के दुःख तार्यो ।
तंडुल तिन मुठी मुख दार्यो ॥26॥
प्रेम के साग विदुर घर मांगे ।
दुर्योधन के मेवा त्यागे ॥27॥
लखि प्रेम की महिमा भारी ।
नौमी श्याम दीनन हितकारी
29 - 32
भारत में पार्थ रथ हांके ।
लिये चक्र कर नहीं बल थाके ॥29॥
निज गीता के ज्ञान सुनाई ।
भगतन हृदय सुधा बरसाई ॥30॥
मीरा थी ऐसी मतवाली ।
विष पी गई बजाकर ताली ॥31॥
राणा भेजा सांप पिटारी ।
शालिग्राम बने बनवारी
33 - 36
निज माया तुम विधिहीन दिखायो ।
उर ते संशय सकल मिटायो ॥33॥
तव शत निंदा करी तत्काला ।
जीवन मुक्त भयो शिशुपाला ॥34॥
जभी द्रौपदी टेर लगाई ।
दीननाथ लाज अब जाई ॥35॥
अस अनाथ के नाथ कन्हैया ।
डूबत भंवर बचावत नैया
37 - 39
सुंदरदास आस उर धारी ।
दया दृष्टि कीजे बनवारी ॥37॥
नाथ सकल मम कुमति निवारो ।
छमो वेग अपराध हमारो ॥38॥
खोलो पट अब दर्शन दीजे ।
बोलो कृष्ण कन्हैया की जय
Closing Doha
यह चालीसा कृष्ण का पाठ करे उर धारी ।
अष्ट सिद्धि नव निधि फल लहे पदार्थ चारी ॥
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Krishna Chalisa का अर्थ क्या है?
कृष्ण चालीसा का पाठ भगवान कृष्ण के प्रति गहरी भक्ति और आत्मसमर्पण का प्रतीक है। इसे गाकर भक्त भगवान के अनुग्रह और आशीर्वाद की प्राप्ति की कामना करते हैं। कृष्ण चालीसा का नियमित पाठ मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
Krishna Chalisa की रचना किसने की और यह कहाँ से आई है?
कृष्ण चालीसा का रचनाकार स्पष्ट रूप से ज्ञात नहीं है, परंतु यह भक्ति परंपरा में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यह हिंदी भाषा में लिखा गया है और इसके माध्यम से भक्त भगवान कृष्ण की महिमा का गान करते हैं।
Krishna Chalisa का जाप कब और कैसे करें?
कृष्ण चालीसा का पाठ बुधवार या जन्माष्टमी के दिन विशेष फलदायी माना जाता है। इसे सुबह के समय शांत मन के साथ बैठकर किया जाना चाहिए। एकाग्रता बनाए रखने के लिए साफ उच्चारण पर बल दें और इसे कम से कम तीन बार दोहराएं।
❤️ Krishna Chalisa के जाप से क्या लाभ होते हैं?
- ✓ आध्यात्मिक शांति और संतोष
- ✓ भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्ति
- ✓ सकारात्मक ऊर्जा का संचार
- ✓ मानसिक तनाव का निवारण
- ✓ भक्ति भावना की वृद्धि
- ✓ दैनिक जीवन में संतुलन