Ashta Lakshmi Stotram — अर्थ सहित संपूर्ण पाठ
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अष्ट लक्ष्मी स्तोत्रम एक भक्ति गीत है जो देवी लक्ष्मी को समर्पित है और इसका मुख्य उद्देश्य आठ प्रकार की लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करना है।
- Hymn
- Ashta Lakshmi Stotram
- Deity
- Goddess Lakshmi
- Number of verses
- 8
- Best day to chant
- Friday
- Available languages
- English, Telugu, Hindi
- Last updated
- 18 Jul 2026
Play along to learn the correct pronunciation and rhythm.
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Ashta Lakshmi Stotram के संपूर्ण बोल
📄 Download Hindi PDFआदिलक्ष्मि
सुमनस वंदित सुंदरि माधवि, चंद्र सहॊदरि हेममये
मुनिगण वंदित मोक्षप्रदायनि, मंजुल भाषिणि वेदनुते ।
पंकजवासिनि देव सुपूजित, सद्गुण वर्षिणि शांतियुते
जय जयहे मधुसूदन कामिनि, आदिलक्ष्मि परिपालय माम्
धान्यलक्ष्मि
अयिकलि कल्मष नाशिनि कामिनि, वैदिक रूपिणि वेदमये
क्षीर समुद्भव मंगल रूपिणि, मंत्रनिवासिनि मंत्रनुते ।
मंगलदायिनि अंबुजवासिनि, देवगणाश्रित पादयुते
जय जयहे मधुसूदन कामिनि, धान्यलक्ष्मि सदापालय माम् [परिपालय माम्]
धैर्यलक्ष्मि
जयवरवर्षिणि वैष्णवि भार्गवि, मंत्र स्वरूपिणि मंत्रमये [जयवरवर्णिनि]
सुरगण पूजित शीघ्र फलप्रद, ज्ञान विकासिनि शास्त्रनुते ।
भवभयहारिणि पापविमोचनि, साधु जनाश्रित पादयुते
जय जयहे मधु सूधन कामिनि, धैर्यलक्ष्मी परिपालय माम्
गजलक्ष्मि
जय जय दुर्गति नाशिनि कामिनि, सर्वफलप्रद शास्त्रमये
रधगज तुरगपदाति समावृत, परिजन मंडित लोकनुते ।
हरिहर ब्रह्म सुपूजित सेवित, ताप निवारिणि पादयुते
जय जयहे मधुसूदन कामिनि, गजलक्ष्मी रूपेण पालय माम्
संतानलक्ष्मि
अयिखग वाहिनि मोहिनि चक्रिणि, रागविवर्धिनि ज्ञानमये
गुणगणवारधि लोकहितैषिणि, स्वरसप्त भूषित गाननुते । [सप्तस्वर]
सकल सुरासुर देव मुनीश्वर, मानव वंदित पादयुते
जय जयहे मधुसूदन कामिनि, संतानलक्ष्मी त्वं पालय माम् [परिपालय माम्]
विजयलक्ष्मि
जय कमलासिनि सद्गति दायिनि, ज्ञानविकासिनि गानमये
अनुदिन मर्चित कुंकुम धूसर, भूषित वासित वाद्यनुते ।
कनकधरास्तुति वैभव वंदित, शंकरदेशिक मान्यपदे
जय जयहे मधुसूदन कामिनि, विजयलक्ष्मी सदा पालय माम् [परिपालय माम्]
विद्यालक्ष्मि
प्रणत सुरेश्वरि भारति भार्गवि, शोकविनाशिनि रत्नमये
मणिमय भूषित कर्णविभूषण, शांति समावृत हास्यमुखे ।
नवनिधि दायिनि कलिमलहारिणि, कामित फलप्रद हस्तयुते
जय जयहे मधुसूदन कामिनि, विद्यालक्ष्मी सदा पालय माम्
धनलक्ष्मि
धिमिधिमि धिंधिमि धिंधिमि-दिंधिमि, दुंधुभि नाद सुपूर्णमये
घुमघुम घुंघुम घुंघुम घुंघुम, शंख निनाद सुवाद्यनुते ।
वेद पूराणेतिहास सुपूजित, वैदिक मार्ग प्रदर्शयुते
जय जयहे मधुसूदन कामिनि, धनलक्ष्मि रूपेणा पालय माम्
📄 Download PDF — Ashta Lakshmi Stotram
Ashta Lakshmi Stotram का अर्थ क्या है?
अष्ट लक्ष्मी स्तोत्रम का जाप करने से भक्त को देवी लक्ष्मी की आठ रूपों की कृपा प्राप्त होती है। यह स्तोत्र विशेष रूप से धन, समृद्धि, ज्ञान और साहस की प्राप्ति के लिए किया जाता है। इसकी भक्ति से पारिवारिक समृद्धि और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। यह स्तोत्र भक्तों को आत्मिक संतोष और मानसिक शांति भी प्रदान करता है।
Ashta Lakshmi Stotram की रचना किसने की और यह कहाँ से आई है?
अष्ट लक्ष्मी स्तोत्रम का रचनाकार अज्ञात है, लेकिन यह संस्कृत भाषा में रचित है। यह स्तोत्र विभिन्न धार्मिक परंपराओं में पाया जाता है और इसका कोई निश्चित स्रोत ग्रंथ नहीं है।
Ashta Lakshmi Stotram का जाप कब और कैसे करें?
अष्ट लक्ष्मी स्तोत्रम का जाप शुक्रवार को करना विशेष फलदायी माना जाता है। इसे कम से कम 11 बार दोहराना चाहिए। जाप करते समय ध्यान मुद्रा में बैठें और उच्चारण स्पष्ट होना चाहिए।
❤️ Ashta Lakshmi Stotram के जाप से क्या लाभ होते हैं?
- ✓ धन और समृद्धि की प्राप्ति
- ✓ ज्ञान और विद्या का विकास
- ✓ साहस और आत्मविश्वास की वृद्धि
- ✓ पारिवारिक सुख-शांति
- ✓ आत्मिक संतोष
- ✓ मानसिक शांति