Maha Lakshmi Ashtakam — अर्थ सहित संपूर्ण पाठ
Free complete guide with audio learning, line-by-line meaning, and practice session. Master the Maha Lakshmi Ashtakam in just one hour.
'Maha Lakshmi Ashtakam' देवी लक्ष्मी को समर्पित एक भक्ति स्तोत्र है, जिसका मुख्य उद्देश्य धन और समृद्धि की देवी की कृपा प्राप्त करना है। यह स्तुति भक्तों को देवी की महिमा का वर्णन करते हुए उनकी कृपा पाने के लिए प्रोत्साहित करती है।
- Hymn
- Maha Lakshmi Ashtakam
- Deity
- Goddess Lakshmi
- Number of verses
- 5
- Best day to chant
- Friday
- Available languages
- English, Telugu, Hindi
- Last updated
- 18 Jul 2026
Play along to learn the correct pronunciation and rhythm.
📖 Read Maha Lakshmi Ashtakam in other languages: Maha Lakshmi Ashtakam in English, Maha Lakshmi Ashtakam in Telugu
Maha Lakshmi Ashtakam के संपूर्ण बोल
📄 Download Hindi PDF1 - 2
नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते ।
शंखचक्र गदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ 1 ॥
नमस्ते गरुडारूढे कोलासुर भयंकरि ।
सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते
3 - 4
सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्व दुष्ट भयंकरि ।
सर्वदुःख हरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ 3 ॥
सिद्धि बुद्धि प्रदे देवि भुक्ति मुक्ति प्रदायिनि ।
मंत्र मूर्ते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते
5 - 6
आद्यंत रहिते देवि आदिशक्ति महेश्वरि ।
योगज्ञे योग संभूते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ 5 ॥
स्थूल सूक्ष्म महारौद्रे महाशक्ति महोदरे ।
महा पाप हरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते
7 - 8
पद्मासन स्थिते देवि परब्रह्म स्वरूपिणि ।
परमेशि जगन्मातः महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ 7 ॥
श्वेतांबरधरे देवि नानालंकार भूषिते ।
जगस्थिते जगन्मातः महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते
इंद्र उवाच
महालक्ष्मष्टकं स्तोत्रं यः पठेद् भक्तिमान् नरः ।
सर्व सिद्धि मवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा ॥
एककाले पठेन्नित्यं महापाप विनाशनम् ।
द्विकालं यः पठेन्नित्यं धन धान्य समन्वितः ॥
त्रिकालं यः पठेन्नित्यं महाशत्रु विनाशनम् ।
महालक्ष्मी र्भवेन्-नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा ॥
[इंत्यकृत श्री महालक्ष्म्यष्टक स्तोत्रं संपूर्णम्]
📄 Download PDF — Maha Lakshmi Ashtakam
Maha Lakshmi Ashtakam का अर्थ क्या है?
'महा लक्ष्मी अष्टकम' का जप करने से भक्तों को आध्यात्मिक और भौतिक समृद्धि प्राप्त होती है। यह स्तोत्र विशेष रूप से धन की देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए जाना जाता है। भक्त इसे नियमित रूप से जपकर जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति करते हैं। यह स्तोत्र भक्तों को उनके जीवन के सभी क्षेत्रों में संतुलन लाने में सहायक होता है।
Maha Lakshmi Ashtakam की रचना किसने की और यह कहाँ से आई है?
'महा लक्ष्मी अष्टकम' का रचयिता अज्ञात है, लेकिन यह संस्कृत में रचित एक प्राचीन स्तोत्र है। यह 'पद्म पुराण' में वर्णित है और भारतीय धार्मिक परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इस स्तोत्र का उपयोग सदियों से देवी लक्ष्मी की आराधना के लिए किया जा रहा है।
Maha Lakshmi Ashtakam का जाप कब और कैसे करें?
'महा लक्ष्मी अष्टकम' का जप शुक्रवार को, विशेष रूप से लक्ष्मी पूजा के समय करना शुभ माना जाता है। इसे प्रातःकाल साफ मन और शुद्ध उच्चारण के साथ किया जाना चाहिए। मंत्र का जप 11, 21 या 108 बार किया जा सकता है। बैठकर दीपक जलाकर मंत्र का जप करना चाहिए।
❤️ Maha Lakshmi Ashtakam के जाप से क्या लाभ होते हैं?
- ✓ धन और समृद्धि की प्राप्ति
- ✓ आर्थिक समस्याओं से मुक्ति
- ✓ शांति और संतोष की प्राप्ति
- ✓ पारिवारिक कल्याण में वृद्धि
- ✓ भौतिक सुखों में वृद्धि
- ✓ जीवन में संतुलन और स्थिरता