Nava Graha Stotram — अर्थ सहित संपूर्ण पाठ
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नव ग्रह स्तोत्रम एक भक्ति-गीत है जो नवग्रहों को समर्पित है और इसका मुख्य उद्देश्य उनके आशीर्वाद प्राप्त करना है। यह स्तोत्र नवग्रहों के प्रभाव को शांत करने और जीवन में संतुलन लाने के लिए गाया जाता है।
- Hymn
- Nava Graha Stotram
- Deity
- Navagraha
- Number of verses
- 9
- Available languages
- English, Telugu, Hindi
- Last updated
- 18 Jul 2026
Play along to learn the correct pronunciation and rhythm.
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Nava Graha Stotram के संपूर्ण बोल
📄 Download Hindi PDFरविः
जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम् ।
तमोऽरिं सर्व पापघ्नं प्रणतोस्मि दिवाकरम् ॥
चंद्रः
दधिशंख तुषाराभं क्षीरार्णव समुद्भवम् (क्षीरोदार्णव संभवम्) ।
नमामि शशिनं सोमं शंभो-र्मकुट भूषणम् ॥
कुजः
धरणी गर्भ संभूतं विद्युत्कांति समप्रभम् ।
कुमारं शक्तिहस्तं तं कुजं [मंगलं] प्रणमाम्यहम् ॥
बुधः
प्रियंगु कलिकाश्यामं रूपेणा प्रतिमं बुधम् ।
सौम्यं सौम्य (सत्व) गुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम् ॥
शुक्रः
हिमकुंद मृणालाभं दैत्यानं परमं गुरुम् ।
सर्वशास्त्र प्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम् ॥
शनिः
नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम् ।
छाया मार्तांड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम् ॥
राहुः
अर्धकायं महावीरं चंद्रादित्य विमर्धनम् ।
सिंहिका गर्भ संभूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम् ॥
केतुः
पलाश पुष्प संकाशं तारकाग्रहमस्तकम् ।
रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम् ॥
फलश्रुतिः
इति व्यास मुखोद्गीतं यः पठेत्सु समाहितः ।
दिवा वा यदि वा रात्रौ विघ्नशांति-र्भविष्यति ॥
नरनारी-नृपाणां च भवे-द्दुःस्वप्न-नाशनम् ।
ऐश्वर्यमतुलं तेषामारोग्यं पुष्टि वर्धनम् ॥
ग्रहनक्षत्रजाः पीडास्तस्कराग्नि समुद्भवाः ।
तास्सर्वाः प्रशमं यांति व्यासो ब्रूते न संशयः ॥
इति व्यास विरचितं नवग्रह स्तोत्रं संपूर्णम् ।
📄 Download PDF — Nava Graha Stotram
Nava Graha Stotram का अर्थ क्या है?
नव ग्रह स्तोत्रम का जाप करने से व्यक्ति को नवग्रहों के नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति मिलती है और जीवन में शांति आती है। यह स्तोत्र जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि लाता है। भक्त इसे ग्रहों के प्रभाव को नियंत्रित करने और जीवन की कठिनाइयों को दूर करने के लिए गाते हैं। यह स्तोत्र नवग्रहों की कृपा प्राप्त करने का एक साधन माना जाता है।
Nava Graha Stotram की रचना किसने की और यह कहाँ से आई है?
नव ग्रह स्तोत्रम के रचयिता के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है, लेकिन यह कई धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में पाया जाता है। यह संस्कृत भाषा में रचित एक प्राचीन स्तोत्र है। इसका उल्लेख वैदिक और पौराणिक साहित्य में देखने को मिलता है।
Nava Graha Stotram का जाप कब और कैसे करें?
नव ग्रह स्तोत्रम का जाप मंगलवार और शनिवार को करना विशेष लाभकारी होता है। इसे सूर्योदय के समय, ध्यान मुद्रा में बैठकर 9 बार गाना चाहिए। स्पष्ट उच्चारण सुनिश्चित करें और ध्यान केंद्रित रखें।
❤️ Nava Graha Stotram के जाप से क्या लाभ होते हैं?
- ✓ नवग्रहों के दोषों का शमन
- ✓ जीवन में संतुलन और शांति
- ✓ आध्यात्मिक उन्नति
- ✓ सकारात्मक ऊर्जा का संचार