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Shani Chalisa — अर्थ सहित संपूर्ण पाठ

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Shani Dev — devotional image

शनि चालीसा एक भक्तिगीत है जो शनि देव को समर्पित है और इसका मुख्य उद्देश्य शनि देव की कृपा प्राप्त करना है। यह चालीसा शनि देव के गुणों और महिमा का वर्णन करती है।

Hymn
Shani Chalisa
Deity
Shani Dev
Number of verses
11
Best day to chant
Saturday
Available languages
English, Telugu, Hindi
Last updated
18 Jul 2026
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Shani Chalisa के संपूर्ण बोल

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Opening Doha

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल ।
दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ॥

जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज ।
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज ॥

1 - 4

जयति जयति शनिदेव दयाला ।
करत सदा भक्तन प्रतिपाला ॥ 1 ॥

चारि भुजा, तनु श्याम विराजै ।
माथे रतन मुकुट छवि छाजै ॥ 2 ॥

परम विशाल मनोहर भाला ।
टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला ॥ 3 ॥

कुण्डल श्रवण चमाचम चमके ।
हिये माल मुक्तन मणि दमके

5 - 8

कर में गदा त्रिशूल कुठारा ।
पल बिच करैं अरिहिं संहारा ॥ 5 ॥

पिंगल, कृष्णों, छाया, नंदन ।
यम, कोणस्थ, रौद्र, दुख भंजन ॥ 6 ॥

सौरी, मंद, शनि, दश नामा ।
भानु पुत्र पूजहिं सब कामा ॥ 7 ॥

जा पर प्रभु प्रसन्न है जाहिं ।
रंकहुं राव करैंक्षण माहिं

9 - 12

पर्वतहू तृण होई निहारत ।
तृण हू को पर्वत करि डारत ॥ 9 ॥

राज मिलत बन रामहिं दीन्हो ।
कैकेइहुं की मति हरि लीन्हों ॥ 10 ॥

बनहूं में मृग कपट दिखाई ।
मातु जानकी गी चतुराई ॥ 11 ॥

लखनहिं शक्ति विकल करि डारा ।
मचिगा दल में हाहाकारा

13 - 16

रावण की गति-मति बौराई ।
रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई ॥ 13 ॥

दियो कीट करि कंचन लंका ।
बजि बजरंग बीर की डंका ॥ 14 ॥

नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा ।
चित्र मयूर निगलि गै हारा ॥ 15 ॥

हार नौलाखा लाग्यो चोरी ।
हाथ पैर डरवायो तोरी

17 - 20

भारी दशा निकृष्ट दिखायो ।
तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो ॥ 17 ॥

विनय राग दीपक महं कीन्होम् ।
तब प्रसन्न प्रभु है सुख दीन्हों ॥ 18 ॥

हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी ।
आपहुं भरे डोम घर पानी ॥ 19 ॥

तैसे नल परदशा सिरानी ।
भूंजी-मीन कूद गी पानी

21 - 24

श्री शंकरहि गहयो जब जाई ।
पार्वती को सती कराई ॥ 21 ॥

तनिक विलोकत ही करि रीसा ।
नभ उडि गयो गौरिसुत सीसा ॥ 22 ॥

पांडव पर भै दशा तुम्हारी ।
बची द्रौपदी होती उघारी ॥ 23 ॥

कौरव के भी गति मति मारयो ।
युद्ध महाभारत करि डारयो

25 - 28

रवि कहं मुख महं धरि तत्काला ।
लेकर कूदि परयो पाताला ॥ 25 ॥

शेष देव-लखि विनती लाई ।
रवि को मुख ते दियो छुड़ाई ॥ 26 ॥

वाहन प्रभु के सात सुजाना ।
जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना ॥ 27 ॥

जम्बुक सिंह आदि नखधारी ।
सो फल ज्योतिष कहत पुकारी

29 - 32

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं ।
हय ते सुख संपत्ति उपजावैं ॥ 29 ॥

गर्दभ हानि करै बहु काजा ।
गर्दभ सिद्ध कर राज समाजा ॥ 30 ॥

जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै ।
मृग दे कष्ट प्राण संहारै ॥ 31 ॥

जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी ।
चोरी आदि होय डर भारी

33 - 36

तैसहि चारि चरण यह नामा ।
स्वर्ण लौह चांजी अरु तामा ॥ 33 ॥

लौह चरण पर जब प्रभु आवैं ।
धन जन संपत्ति नष्ट करवैं ॥ 34 ॥

समता ताम्र रजत शुभकारी ।
स्वर्ण सर्व सुख मंगलकारी ॥ 35 ॥

जो यह शनि चरित्र नित गावै ।
कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै

37 - 40

अद्भुत नाथ दिखावैं लीला ।
करैं शत्रु के नशि बलि ढीला ॥ 37 ॥

जो पंडित सुयोग्य बुलवाई ।
विधिवत शनि ग्रह शांति कराई ॥ 38 ॥

पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत ।
दीप दान दै बहु सुख पावत ॥ 39 ॥

कहत रामसुंदर प्रभु दासा ।
शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा

Shani Chalisa – Lyrics, Meaning, Audio & PDF

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Shani Chalisa का अर्थ क्या है?

शनि चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को शनि ग्रह के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है। भक्त इसे शनि देव की कृपा प्राप्त करने और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए पढ़ते हैं। यह चालीसा व्यक्तिगत और आध्यात्मिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

Shani Chalisa की रचना किसने की और यह कहाँ से आई है?

शनि चालीसा की रचना के विषय में विशेष जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह हिंदी भाषा में लिखी गई है और इसे प्राचीन भारतीय भक्तिमार्ग परंपरा का हिस्सा माना जाता है।

Shani Chalisa का जाप कब और कैसे करें?

शनि चालीसा का पाठ शनिवार के दिन शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। इसे सूर्योदय के समय शांत मन से पढ़ना श्रेष्ठ होता है। पाठ के लिए उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना और ध्यानपूर्वक उच्चारण करना चाहिए।

❤️ Shani Chalisa के जाप से क्या लाभ होते हैं?

  • शनि देव की कृपा प्राप्त होती है
  • कष्टों का निवारण होता है
  • शनि ग्रह के अशुभ प्रभाव कम होते हैं
  • आध्यात्मिक शांति मिलती है
  • जीवन में स्थिरता आती है

Frequently Asked Questions