शुभ दिन · भारत · IST
नामकरण मुहूर्त
नामकरण संस्कार (नामकरण) के लिए शुभ दिन।
संक्षेप में
आगामी मासों में 8 शुभ नामकरण तिथियाँ हैं (भारत, IST) — जैसे 4 सितंबर, 2 जनवरी, 4 जनवरी, 10 जनवरी। नीचे प्रत्येक तिथि का नक्षत्र, तिथि और सुझाई गई मुहूर्त अवधि दी गई है।
आगामी शुभ तिथियाँ
सितंबर 2026
जनवरी 2027
मार्च 2027
अप्रैल 2027
मई 2027
जून 2027
तिथियाँ पूरे भारत के लिए हैं; दिखाई गई मुहूर्त अवधि हैदराबाद/IST संदर्भ की है और शहर के अनुसार कुछ मिनट बदलती है। अपने परिवार के विवरण के अनुसार सटीक समय पुरोहित से पुष्ट करें।
नामकरण मुहूर्त क्या है?
नामकरण संस्कार (नामकरण) के लिए शुभ दिन।
नामकरण नाम रखने का संस्कार है, पारंपरिक रूप से जन्म के 11वें या 12वें दिन, या बाद के किसी शुभ दिन। बच्चे के कल्याण के लिए अनुकूल नक्षत्र, शुभ तिथि और वार से शुभ मुहूर्त चुना जाता है।
सौम्य, शुभ नक्षत्र और शुभ तिथियाँ वरीय हैं, जबकि भद्रा, अमावस्या, रिक्ता तिथि और अशुभ योग टाले जाते हैं। नाम का पहला अक्षर अक्सर जन्म नक्षत्र से लिया जाता है।
नीचे दी गई तिथियाँ भारत (IST) के पंचांग से गणना की गई हैं। सटीक दिन और नाम-अक्षर की पुष्टि पुरोहित से करें।
नामकरण मुहूर्त कैसे चुनें
- 1 नीचे दी गई सूची से एक अनुकूल नक्षत्र और शुभ तिथि चुनें।
- 2 भद्रा (विष्टि करण), अमावस्या, रिक्ता तिथि और अशुभ योग (व्यतीपात, वैधृति) टालें।
- 3 चुने हुए दिन के भीतर अभिजित मुहूर्त या अमृत काल जैसी शुभ मुहूर्त अवधि का उपयोग करें।
- 4 सटीक समय अपने परिवार के जन्म विवरण के अनुसार पुरोहित से पुष्ट करें।
How this is calculated
Auspicious dates are selected from the panchang by weighing the nakshatra, tithi, weekday and yoga, and excluding inauspicious periods — Bhadra (Vishti karana), Amavasya, Rikta tithis and yogas such as Vyatipata and Vaidhriti — following classical muhurta guidance (Dharmasindhu / Nirnaya Sindhu). A personal muhurta also weighs your family's birth details; confirm with a priest.
सामान्य प्रश्न
नामकरण सामान्यतः कब किया जाता है?
अक्सर जन्म के 11वें या 12वें दिन, या बाद के किसी शुभ दिन जब परिवार एकत्र होता है।
बच्चे का नाम कैसे चुना जाता है?
पहला अक्षर अक्सर बच्चे के जन्म नक्षत्र के पाद से लिया जाता है, और नामकरण शुभ मुहूर्त दिन पर होता है।
नामकरण के लिए कौन-से नक्षत्र और दिन अच्छे हैं?
अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, पुनर्वसु, हस्त, चित्रा, स्वाति, श्रवण, धनिष्ठा और रेवती जैसे सौम्य नक्षत्र, सोमवार/बुधवार/गुरुवार/शुक्रवार को वरीय हैं; भद्रा, अमावस्या और रिक्ता तिथि टाली जाती हैं।
क्या नामकरण 12 दिन बाद किया जा सकता है?
हाँ — यदि 11वें या 12वें दिन न हो सके तो इसे बाद में, सामान्यतः पहले, तीसरे या चौथे मास में, या पहले जन्मदिन के आसपास शुभ दिन पर किया जा सकता है।
नामकरण संस्कार की विधि क्या है?
यह गणेश पूजा और हवन से आरंभ होता है; पिता बच्चे के दाहिने कान में चुना गया नाम कहते हैं, नाम की घोषणा की जाती है और बच्चे की दीर्घायु का आशीर्वाद दिया जाता है।
नामकरण में किसकी पूजा होती है?
निर्विघ्न संस्कार के लिए पहले गणेश और कुलदेवता की पूजा होती है; कुछ लोग सूर्य और बच्चे के जन्म नक्षत्र के देवता की भी पूजा करते हैं।