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Durga Devi Chalisa — अर्थ सहित संपूर्ण पाठ

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Goddess Durga — devotional image

'Durga Devi Chalisa' माँ दुर्गा को समर्पित एक भक्ति स्तोत्र है, जिसका मुख्य उद्देश्य देवी दुर्गा की महिमा और आशीर्वाद प्राप्त करना है। यह स्तोत्र भक्तों को शक्ति, साहस और समृद्धि प्रदान करने के लिए गाया जाता है।

Hymn
Durga Devi Chalisa
Deity
Goddess Durga
Number of verses
10
Best day to chant
Friday
Available languages
English, Telugu, Hindi
Last updated
18 Jul 2026
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Durga Devi Chalisa के संपूर्ण बोल

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1 -4

नमो नमो दुर्गे सुख करनी ।
नमो नमो अंबे दुःख हरनी ॥ 1 ॥

निरंकार है ज्योति तुम्हारी ।
तिहू लोक फैली उजियारी ॥ 2 ॥

शशि ललाट मुख महाविशाला ।
नेत्र लाल भृकुटि विकराला ॥ 3 ॥

रूप मातु को अधिक सुहावे ।
दरश करत जन अति सुख पावे

5 - 8

तुम संसार शक्ति लय कीना ।
पालन हेतु अन्न धन दीना ॥ 5 ॥

अन्नपूर्णा हुयि जग पाला ।
तुम ही आदि सुंदरी बाला ॥ 6 ॥

प्रलयकाल सब नाशन हारी ।
तुम गौरी शिव शंकर प्यारी ॥ 7 ॥

शिव योगी तुम्हरे गुण गावेम् ।
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावेम्

9 - 12

रूप सरस्वती का तुम धारा ।
दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा ॥ 9 ॥

धरा रूप नरसिंह को अंबा ।
परगट भयि फाड के खंबा ॥ 10 ॥

रक्षा कर प्रह्लाद बचायो ।
हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो ॥ 11 ॥

लक्ष्मी रूप धरो जग माहीम् ।
श्री नारायण अंग समाहीम्

13 - 16

क्षीरसिंधु में करत विलासा ।
दयासिंधु दीजै मन आसा ॥ 13 ॥

हिंगलाज में तुम्हीं भवानी ।
महिमा अमित न जात बखानी ॥ 14 ॥

मातंगी धूमावति माता ।
भुवनेश्वरी बगला सुखदाता ॥ 15 ॥

श्री भैरव तारा जग तारिणी ।
छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी

17 - 23

केहरि वाहन सोह भवानी ।
लांगुर वीर चलत अगवानी ॥ 17 ॥

कर में खप्पर खडग विराजे ।
जाको देख काल डर भाजे ॥ 18 ॥

तोहे कर में अस्त्र त्रिशूला ।
जाते उठत शत्रु हिय शूला ॥ 19 ॥

नगरकोटि में तुम्हीं विराजत ।
तिहुँ लोक में डंका बाजत ॥ 20 ॥

शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे ।
रक्तबीज शंखन संहारे ॥ 21 ॥

महिषासुर नृप अति अभिमानी ।
जेहि अघ भार मही अकुलानी ॥ 22 ॥

रूप कराल कालिका धारा ।
सेन सहित तुम तिहि संहारा

21 - 24

शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे ।
रक्तबीज शंखन संहारे ॥ 21 ॥

महिषासुर नृप अति अभिमानी ।
जेहि अघ भार मही अकुलानी ॥ 22 ॥

रूप कराल कालिका धारा ।
सेन सहित तुम तिहि संहारा ॥ 23 ॥

पडी भीढ संतन पर जब जब ।
भयि सहाय मातु तुम तब तब

25 - 28

अमरपुरी अरु बासव लोका ।
तब महिमा सब कहें अशोका ॥ 25 ॥

ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी ।
तुम्हें सदा पूजें नर नारी ॥ 26 ॥

प्रेम भक्ति से जो यश गावेम् ।
दुःख दारिद्र निकट नहिं आवेम् ॥ 27 ॥

ध्यावे तुम्हें जो नर मन लायि ।
जन्म मरण ते सौं छुट जायि

29 - 32

जोगी सुर मुनि कहत पुकारी ।
योग न होयि बिन शक्ति तुम्हारी ॥ 29 ॥

शंकर आचारज तप कीनो ।
काम अरु क्रोध जीत सब लीनो ॥ 30 ॥

निशिदिन ध्यान धरो शंकर को ।
काहु काल नहिं सुमिरो तुमको ॥ 31 ॥

शक्ति रूप को मरम न पायो ।
शक्ति गयी तब मन पछतायो

33 - 36

शरणागत हुयि कीर्ति बखानी ।
जय जय जय जगदंब भवानी ॥ 33 ॥

भयि प्रसन्न आदि जगदंबा ।
दयि शक्ति नहिं कीन विलंबा ॥ 34 ॥

मोको मातु कष्ट अति घेरो ।
तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो ॥ 35 ॥

आशा तृष्णा निपट सतावेम् ।
रिपु मूरख मॊहि अति दर पावैम्

37 - 40

शत्रु नाश कीजै महारानी ।
सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी ॥ 37 ॥

करो कृपा हे मातु दयाला ।
ऋद्धि-सिद्धि दे करहु निहाला । 38 ॥

जब लगि जियू दया फल पावू ।
तुम्हरो यश मैं सदा सुनावू ॥ 39 ॥

दुर्गा चालीसा जो गावै ।
सब सुख भोग परमपद पावै ॥ 40 ॥

देवीदास शरण निज जानी ।
करहु कृपा जगदंब भवानी ॥

Durga Devi Chalisa – Lyrics, Meaning, Audio & PDF

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Durga Devi Chalisa का अर्थ क्या है?

'Durga Devi Chalisa' का पाठ करने से भक्त देवी दुर्गा की कृपा प्राप्त करते हैं, जो उन्हें शक्ति और साहस प्रदान करती हैं। यह चालीसा विशेष रूप से नवरात्रि के समय गाया जाता है जब भक्त देवी की आराधना करते हैं। यह स्तोत्र मन की शांति और आत्मबल को बढ़ाता है और भक्तों को नकारात्मकता से दूर रखता है।

Durga Devi Chalisa की रचना किसने की और यह कहाँ से आई है?

'Durga Devi Chalisa' का रचयिता विशिष्ट रूप से ज्ञात नहीं है, लेकिन यह पारंपरिक रूप से हिंदी भाषा में गाया जाता है। यह चालीसा हिंदू धार्मिक परंपराओं में जन्मी है और सदियों से भक्तों के बीच लोकप्रिय है।

Durga Devi Chalisa का जाप कब और कैसे करें?

'Durga Devi Chalisa' को मंगलवार और शुक्रवार को विशेष रूप से सुबह के समय गाना शुभ माना जाता है। इसे 11, 21, या 108 बार गाना चाहिए। पाठ के दौरान शुद्ध उच्चारण और ध्यान केंद्रित रखने की सलाह दी जाती है।

❤️ Durga Devi Chalisa के जाप से क्या लाभ होते हैं?

  • शक्ति और साहस में वृद्धि
  • समृद्धि और कल्याण
  • मन की शांति
  • नकारात्मकता से सुरक्षा
  • आत्मबल में सुधार

Frequently Asked Questions