Sri Shiridi Sai Chalisa — अर्थ सहित संपूर्ण पाठ
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"श्री शिरडी साई चालीसा" एक भक्ति भजन है जो शिरडी साई बाबा को समर्पित है और इसका मुख्य उद्देश्य भक्तों की आस्था और भक्ति को बढ़ाना है। यह भजन साई बाबा की महिमा और उनके चमत्कारों का गुणगान करता है।
- Hymn
- Sri Shiridi Sai Chalisa
- Deity
- Shirdi Sai Baba
- Number of verses
- 9
- Best day to chant
- Thursday
- Available languages
- English, Telugu, Hindi
- Last updated
- 18 Jul 2026
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Sri Shiridi Sai Chalisa के संपूर्ण बोल
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शिरिडीवासा सायिप्रभो जगतिकि मूलं नीवे प्रभो
दत्त दिगंबर अवतारं नीलो सृष्टि व्यवहारम् ॥
1 - 2
त्रिमूर्तिरूपा ओ सायी करुणिंचि कापाडोयि
दर्शनमिय्य गरावय्य मुक्तिकि मार्गं चूपुमया ॥ 1 ॥
शिरिडीवासा सायिप्रभो ॥
कफिनि वस्त्रमु धरियिंचि भुजमुकु जोली तगिलिंचि
निंब वृक्षपु छायलो फकीरु वेषपु धारणलो
कलियुगमंदुन वॆलसितिवि त्यागं सहनं नेर्पितिवि
शिरिडी ग्रामं नी वासं भक्तुल मदिलो नी रूपम् ॥ 2 ॥
शिरिडीवासा सायिप्रभो ॥
3 - 4
चांद् पाटिल् नु कलुसुकुनि आतनि बाधलु तॆलुसुकुनि
गुर्रमु जाड तॆलिपितिवि पाटिल् बाधनु तीर्चितिवि
वॆलिगिंचावु ज्योतुलनु नीवुपयोगिंचि जलमुलनु
अच्चॆरुवॊंदॆनु आ ग्रामं चूसि विंतैन आ दृश्यम् ॥ 3 ॥
शिरिडीवासा सायिप्रभो ॥
बायिजा चेसॆनु नी सेव प्रतिफलमिच्चावो देवा
नी आयुवुनु बदुलिच्चि तात्यानु नीवु ब्रतिकिंचि
पशुपक्षुलनु प्रेमिंचि प्रेमतो वाटिनि लालिंचि
जीवुलपैन ममकारं चित्रमया नी व्यवहारम् ॥ 4 ॥
शिरिडीवासा सायिप्रभो ॥
5 - 6
नी द्वारमुलो निलिचितिनि निन्ने नित्यमु कॊलिचितिनि
अभयमुनिच्चि ब्रोवुमया ओ शिरिडीशा दयामया
धन्यमु द्वारक ओ मायी नीलो निलिचॆनु श्रीसायि
नी धुनि मंटल वेडिमिकि पापमु पोवुनु ताकिडिकि ॥ 5 ॥
शिरिडीवासा सायिप्रभो ॥
प्रलय कालमु आपितिवि भक्तुलनु नीवु ब्रोचितिवि
चेसि महम्मारी नाशं कापाडि शिरिडी ग्रामं
अग्निहोत्रि शास्त्रिकि लीला महात्म्यं चूपिंचि
श्यामानु ब्रतिकिंचितिवि पामु विषमु तॊलिगिंचि ॥ 6 ॥
शिरिडीवासा सायिप्रभो ॥
7 - 8
भक्त भीमाजीकि क्षयरोगं नशियिंचे आतनि सहनं
ऊदी वैद्यं चेसावु व्याधिनि मायं चेसावु
काकाजीकि ओ सायि विठल दर्शन मिच्चितिवि
दामूकिच्चि संतानं कलिगिंचितिवि संतोषम् ॥ 7 ॥
शिरिडीवासा सायिप्रभो ॥
करुणासिंधू करुणिंचु मापै करुण कुरिपिंचु
सर्वं नीके अर्पितमु पॆंचुमु भक्ति भावमुनु
मुस्लिं अनुकॊनि निनु मेघू तॆलुसुकुनि आतनि बाध
दाल्चि शिवशंकर रूपं इच्चावय्या दर्शनमु ॥ 8 ॥
शिरिडीवासा सायिप्रभो ॥
9 - 10
डाक्टरुकु नीवु रामुनिगा बल्वंतकु श्रीदत्तुनिगा
निमोनुकरकु मारुतिगा चिदंबरकु श्रीगणपतिगा
मार्तांडकु खंडोबागा गणूकु सत्यदेवुनिगा
नरसिंहस्वामिगा जोषिकि दर्शनमु निच्चिन श्रीसायि ॥ 9 ॥
शिरिडीवासा सायिप्रभो ॥
रेयि पगलु नी ध्यानं नित्यं नी लीला पठनं
भक्तितो चेयंडि ध्यानं लभिंचुनु मुक्तिकि मार्गं
पदकॊंडु नी वचनालु बाबा माकवि वेदालु
शरणनि वच्चिन भक्तुलनु करुणिंचि नीवु ब्रोचितिवि ॥ 10 ॥
शिरिडीवासा सायिप्रभो ॥
11 - 12
अंदरिलोन नी रूपं नी महिम अति शक्तिमयं
ओ सायि मेमु मूढुलमु ऒसगुमया माकु ज्ञानमुनु
सृष्टिकि नीवेनय मूलं सायि मेमु सेवकुलं
सायि नाममु तलचॆदमु नित्यमु सायिनि कॊलिचॆदमु ॥ 11 ॥
शिरिडीवासा सायिप्रभो ॥
भक्ति भावन तॆलुसुकॊनि सायिनि मदिलो निलुपुकॊनि
चित्तमुतो सायी ध्यानं चेयंडि प्रतिनित्यं
बाबा काल्चिन धुनि ऊदि निवारिंचुनु अदि व्याधि
समाधि नुंडि श्रीसायि भक्तुलनु कापाडेनोयि ॥ 12 ॥
शिरिडीवासा सायिप्रभो ॥
13 - 14
मन प्रश्नलकु जवाबुलु तॆलुपुनु सायि चरितमुलु
विनंडि लेक चदवंडि सायि सत्यमु चूडंडि
सत्संगमुनु चेयंडि सायि स्वप्नमु पॊंदंडि
भेद भावमुनु मानंडि सायि मन सद्गुरुवंडि ॥ 13 ॥
शिरिडीवासा सायिप्रभो ॥
वंदनमय्या परमेशा आपद्बांधव सायीशा
मा पापमुलू कडतेर्चु मा मदि कोरिक नॆरवेर्चु
करुणामूर्ति ओ सायि करुणतो ममु दरिचेर्चोयी
मा मनसे नी मंदिरमु मा पलुकुले नीकु नैवेद्यम् ॥ 14 ॥
शिरिडीवासा सायिप्रभो ॥
Closing Doha
अखिलांडकोटि ब्रह्मांडनायक
राजाधिराज योगिराज परब्रह्म
श्रीसच्चिदानंद सद्गुरु सायिनाथ् महराज् की जै ॥
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Sri Shiridi Sai Chalisa का अर्थ क्या है?
"श्री शिरडी साई चालीसा" का जाप भक्तों को मानसिक शांति और साई बाबा की कृपा प्राप्त करने में सहायक होता है। यह चालीसा भक्तों को साई बाबा के प्रति श्रद्धा और भक्ति की भावना को गहरा करता है। इसके माध्यम से भक्तों को बाबा के चमत्कारों और शिक्षाओं से जुड़ने का अवसर मिलता है।
Sri Shiridi Sai Chalisa की रचना किसने की और यह कहाँ से आई है?
"श्री शिरडी साई चालीसा" का लेखक अज्ञात है और यह पारंपरिक रूप से हिंदी भाषा में रचित है। यह भजन शिरडी साई बाबा की भक्ति परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो 19वीं सदी के उत्तरार्ध में भारत में प्रचलित हुई।
Sri Shiridi Sai Chalisa का जाप कब और कैसे करें?
"श्री शिरडी साई चालीसा" का पाठ गुरुवार के दिन विशेष फलदायी माना जाता है, जो साई बाबा का प्रिय दिन है। इसे प्रातःकाल या संध्या समय में शांत वातावरण में बैठकर पढ़ा जाता है। शुद्ध उच्चारण और एकाग्रता के साथ पाठ करना चाहिए।
❤️ Sri Shiridi Sai Chalisa के जाप से क्या लाभ होते हैं?
- ✓ मानसिक शांति का अनुभव
- ✓ साई बाबा की कृपा प्राप्ति
- ✓ भक्ति और आस्था में वृद्धि
- ✓ संकटों से मुक्ति
- ✓ आध्यात्मिक विकास
- ✓ जीवन में सकारात्मक ऊर्जा