Shiva Tandava Stotram — अर्थ सहित संपूर्ण पाठ
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शिव तांडव स्तोत्रम भगवान शिव को समर्पित एक दिव्य भजन है, जिसका मुख्य उद्देश्य शिव की महिमा और तांडव नृत्य की शक्ति का वर्णन करना है। इस स्तोत्रम में शिव के अद्भुत स्वरूप और उनके तांडव नृत्य की गहनता को दर्शाया गया है।
- Hymn
- Shiva Tandava Stotram
- Deity
- Lord Shiva
- Number of verses
- 7
- Best day to chant
- Monday
- Available languages
- English, Telugu, Hindi
- Last updated
- 18 Jul 2026
Play along to learn the correct pronunciation and rhythm.
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Shiva Tandava Stotram के संपूर्ण बोल
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जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले
गलेवलंब्य लंबितां भुजंगतुंगमालिकाम् ।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं
चकार चंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम् ॥ 1 ॥
जटाकटाहसंभ्रमभ्रमन्निलिंपनिर्झरी-
-विलोलवीचिवल्लरीविराजमानमूर्धनि ।
धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाटपट्टपावके
किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम
3 - 4
धराधरेंद्रनंदिनीविलासबंधुबंधुर
स्फुरद्दिगंतसंततिप्रमोदमानमानसे ।
कृपाकटाक्षधोरणीनिरुद्धदुर्धरापदि
क्वचिद्दिगंबरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ॥ 3 ॥
जटाभुजंगपिंगलस्फुरत्फणामणिप्रभा
कदंबकुंकुमद्रवप्रलिप्तदिग्वधूमुखे ।
मदांधसिंधुरस्फुरत्त्वगुत्तरीयमेदुरे
मनो विनोदमद्भुतं बिभर्तु भूतभर्तरि
5 - 6
सहस्रलोचनप्रभृत्यशेषलेखशेखर
प्रसूनधूलिधोरणी विधूसरांघ्रिपीठभूः ।
भुजंगराजमालया निबद्धजाटजूटक
श्रियै चिराय जायतां चकोरबंधुशेखरः ॥ 5 ॥
ललाटचत्वरज्वलद्धनंजयस्फुलिंगभा-
-निपीतपंचसायकं नमन्निलिंपनायकम् ।
सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं
महाकपालिसंपदेशिरोजटालमस्तु नः
7 - 8
करालफालपट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल-
द्धनंजयाधरीकृतप्रचंडपंचसायके ।
धराधरेंद्रनंदिनीकुचाग्रचित्रपत्रक-
-प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने मतिर्मम ॥ 7 ॥
नवीनमेघमंडली निरुद्धदुर्धरस्फुरत्-
कुहूनिशीथिनीतमः प्रबंधबंधुकंधरः ।
निलिंपनिर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिंधुरः
कलानिधानबंधुरः श्रियं जगद्धुरंधरः
9 - 10
प्रफुल्लनीलपंकजप्रपंचकालिमप्रभा-
-विलंबिकंठकंदलीरुचिप्रबद्धकंधरम् ।
स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं
गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥ 9 ॥
अगर्वसर्वमंगलाकलाकदंबमंजरी
रसप्रवाहमाधुरी विजृंभणामधुव्रतम् ।
स्मरांतकं पुरांतकं भवांतकं मखांतकं
गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे
11 - 12
जयत्वदभ्रविभ्रमभ्रमद्भुजंगमश्वस-
-द्विनिर्गमत्क्रमस्फुरत्करालफालहव्यवाट् ।
धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदंगतुंगमंगल
ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचंडतांडवः शिवः ॥ 11 ॥
दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजंगमौक्तिकस्रजोर्-
-गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः ।
तृष्णारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेंद्रयोः
समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे
13 - 15
कदा निलिंपनिर्झरीनिकुंजकोटरे वसन्
विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन् ।
विमुक्तलोललोचनो ललाटफाललग्नकः
शिवेति मंत्रमुच्चरन् सदा सुखी भवाम्यहम् ॥ 13 ॥
इमं हि नित्यमेवमुक्तमुत्तमोत्तमं स्तवं
पठन्स्मरन्ब्रुवन्नरो विशुद्धिमेतिसंततम् ।
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथा गतिं
विमोहनं हि देहिनां सुशंकरस्य चिंतनम् ॥ 14 ॥
पूजावसानसमये दशवक्त्रगीतं यः
शंभुपूजनपरं पठति प्रदोषे ।
तस्य स्थिरां रथगजेंद्रतुरंगयुक्तां
लक्ष्मीं सदैव सुमुखिं प्रददाति शंभुः
📄 Download PDF — Shiva Tandava Stotram
Shiva Tandava Stotram का अर्थ क्या है?
शिव तांडव स्तोत्रम का जप करने से भक्त भगवान शिव की कृपा प्राप्त करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इसे अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। यह स्तोत्रम शिव के तांडव नृत्य की महिमा को दर्शाता है, जो सृष्टि, संरक्षण और विनाश का प्रतीक है। भक्त इसे जपकर आत्मिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति की अनुभूति करते हैं।
Shiva Tandava Stotram की रचना किसने की और यह कहाँ से आई है?
शिव तांडव स्तोत्रम की रचना रावण ने की थी। यह स्तोत्र संस्कृत भाषा में लिखा गया है और पौराणिक कथाओं के अनुसार रावण ने इसे तब गाया था जब वह भगवान शिव को प्रसन्न करना चाहता था।
Shiva Tandava Stotram का जाप कब और कैसे करें?
शिव तांडव स्तोत्रम को सोमवार या शिवरात्रि के दिन प्रातःकाल में जपना शुभ माना जाता है। इसे 11, 21 या 108 बार जप सकते हैं। जप के समय शांतिपूर्वक बैठकर उच्चारण की शुद्धता का ध्यान रखना चाहिए।
❤️ Shiva Tandava Stotram के जाप से क्या लाभ होते हैं?
- ✓ आत्मिक शांति की प्राप्ति
- ✓ शिव की कृपा का अनुभव
- ✓ आध्यात्मिक उन्नति
- ✓ संकटों का निवारण
- ✓ सकारात्मक ऊर्जा का संचार