🐘 Book Tomorrow Wednesday Vinayaka Abhishekam
रथ यात्रा 2026

Hindu Festival Guide · 2026

रथ यात्रा 2026

रथ यात्रा भगवान जगन्नाथ का भव्य रथोत्सव है, जो ओडिशा के पुरी में मनाया जाता है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के विशाल लकड़ी के रथों को लाखों श्रद्धालु रस्सियों से खींचते हुए गुंडिचा मंदिर तक ले जाते हैं।

📅 रथ यात्रा 2026:

Quick Answer

When is रथ यात्रा 2026?

📅

रथ यात्रा भगवान जगन्नाथ का भव्य रथोत्सव है, जो ओडिशा के पुरी में मनाया जाता है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के विशाल लकड़ी के रथों को लाखों श्रद्धालु रस्सियों से खींचते हुए गुंडिचा मंदिर तक ले जाते हैं।

Year Date
2025
2026 This year
2027

Deity

भगवान जगन्नाथ (कृष्ण/विष्णु), बलभद्र, सुभद्रा

Lunar month

आषाढ़

Paksha

शुक्ल पक्ष

Tithi

द्वितीया

Duration

9 दिन (रथ यात्रा से बहुडा यात्रा तक)

Regions

ओडिशा (पुरी), पश्चिम बंगाल, झारखंड, विश्वभर के इस्कॉन मंदिर

रथ यात्रा dates by year

2025

2026 Current

2027

About रथ यात्रा

Last updated:

  • 🙏 Deity: भगवान जगन्नाथ (कृष्ण/विष्णु), बलभद्र, सुभद्रा
  • 📅 रथ यात्रा 2026 date:
  • Duration: 9 दिन (रथ यात्रा से बहुडा यात्रा तक)
  • 🌙 Lunar month: आषाढ़
  • 🗺️ Celebrated in: ओडिशा (पुरी), पश्चिम बंगाल, झारखंड, विश्वभर के इस्कॉन मंदिर

रथ यात्रा, अर्थात रथों का उत्सव, विश्व के सबसे प्राचीन और भव्य धार्मिक उत्सवों में से एक है। यह आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाई जाती है और इसमें भगवान जगन्नाथ — जो भगवान विष्णु अथवा कृष्ण के स्वरूप माने जाते हैं — अपने बड़े भाई बलभद्र तथा बहन सुभद्रा के साथ पुरी स्थित अपने मंदिर से गुंडिचा मंदिर की वार्षिक यात्रा पर निकलते हैं।

पुरी की रथ यात्रा सबसे प्रसिद्ध है, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं। भगवान जगन्नाथ का रथ नंदीघोष कहलाता है और लगभग 13–14 मीटर ऊँचा होता है, जिसमें 16 पहिए होते हैं; बलभद्र का रथ तालध्वज तथा सुभद्रा का रथ दर्पदलन कहलाता है। रथ की रस्सी को छूना और खींचना परम पुण्य का कार्य माना जाता है।

गुंडिचा मंदिर में नौ दिनों के प्रवास के बाद देवता बहुडा यात्रा के द्वारा मुख्य जगन्नाथ मंदिर लौटते हैं। विश्वभर के इस्कॉन मंदिर भी इसे रथ महोत्सव के रूप में हर्षोल्लास से मनाते हैं।

Significance of रथ यात्रा

  • सर्वसुलभता: रथ यात्रा में जाति, लिंग या मत के भेद के बिना हर व्यक्ति भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर सकता है और रथ को स्पर्श कर सकता है।
  • जगन्नाथ अर्थात जगत के स्वामी: भगवान का यह स्वरूप परब्रह्म का सबसे सुलभ रूप माना जाता है।
  • चैतन्य महाप्रभु की परंपरा: श्री चैतन्य महाप्रभु ने अपने अंतिम वर्ष पुरी में बिताए और रथ यात्रा में भावविभोर होकर भाग लेते रहे।
  • सामाजिक समानता: पुरी के गजपति राजा सोने की झाड़ू से रथ बुहारते हैं (छेरा पहँरा), जो यह संदेश देता है कि भगवान के समक्ष राजा भी सेवक है।

Deities worshipped on रथ यात्रा

Follow the links to explore each deity’s mantras, stories, and temples on Temples.bio.

भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा के प्रमुख देवता हैं और उन्हें वैष्णव परंपरा में भगवान विष्णु अथवा कृष्ण का स्वरूप माना जाता है। उनके बड़े नेत्र तथा अर्धनिर्मित काष्ठ स्वरूप ब्रह्म के सर्वसुलभ रूप का प्रतीक हैं।

बलभद्र (बलराम) शक्ति और धर्म के प्रतीक हैं तथा तालध्वज रथ पर विराजते हैं। देवी सुभद्रा योगमाया का स्वरूप मानी जाती हैं और दर्पदलन रथ पर विराजती हैं। भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र भी इस यात्रा में सम्मिलित होता है।

How to celebrate रथ यात्रा 2026

रथ यात्रा में सहभागिता कैसे करें:

1. यदि पुरी जा रहे हों तो प्रातः जल्दी पहुँचें; भीड़ अत्यधिक होती है, अतः पूर्व-योजना बनाएं।

2. घर पर प्रातः स्नान कर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमा के साथ पूजा स्थल सजाएं।

3. पीले पुष्प, तुलसी, नारियल और ऋतुफल अर्पित करें।

4. महाप्रसाद (बिना प्याज-लहसुन का सात्विक भोग) अर्पित करें।

5. जगन्नाथ अष्टकम, हरे कृष्ण महामंत्र अथवा "जय जगन्नाथ" का जाप करें।

6. यदि आपके नगर में इस्कॉन या वैष्णव संस्था द्वारा रथ यात्रा हो तो रथ की रस्सी खींचने में सहभागी बनें।

7. अन्नदान करें और बहुडा यात्रा के दिन पुनः पूजा करें।

Rituals & regional traditions

  • स्नान यात्रा रथ यात्रा से पंद्रह दिन पूर्व होती है, जिसमें देवताओं का भव्य स्नान कराया जाता है।
  • छेरा पहँरा: गजपति राजा सोने की झाड़ू से रथ बुहारते हैं।
  • रथ निर्माण: प्रत्येक वर्ष बिना कीलों के विशेष काष्ठ से नए रथ बनाए जाते हैं।
  • गुंडिचा प्रवास: देवता नौ दिन गुंडिचा मंदिर में रहते हैं।
  • बहुडा यात्रा: वापसी यात्रा में रथ मौसी माँ मंदिर पर रुकते हैं जहाँ पोड़ा पीठा अर्पित किया जाता है।

Spiritual benefits

  • भगवान जगन्नाथ के रथ की रस्सी एक बार खींचने मात्र से सौ अश्वमेध यज्ञों के समान पुण्य प्राप्त होता है।
  • रथ पर भगवान के दर्शन से जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति मिलती है।
  • महाप्रसाद ग्रहण करने से शरीर, मन और कर्म शुद्ध होते हैं।
  • इस दिन किया गया अन्नदान अनेक गुना फलदायी होता है।

Mantras & sacred chants

मंत्र 1 — जगन्नाथ अष्टकम (प्रारंभिक श्लोक):

ॐ नमो भगवते जगन्नाथाय

अर्थ: मैं जगत के स्वामी भगवान जगन्नाथ को प्रणाम करता हूँ।

मंत्र 2 — हरे कृष्ण महामंत्र:

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥

अर्थ: हे कृष्ण, हे राम, कृपया मुझे अपनी सेवा में लगाएं। यह महामंत्र मन के दर्पण को स्वच्छ करता है।

रथ यात्रा 2026 — FAQs

रथ यात्रा 2026 गुरुवार, 16 जुलाई 2026 को है, जो आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है। बहुडा यात्रा (वापसी यात्रा) शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 को है।

सबसे प्रसिद्ध रथ यात्रा ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में मनाई जाती है, जहाँ प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु एकत्र होते हैं।

भगवान जगन्नाथ का रथ नंदीघोष (16 पहिए), बलभद्र का रथ तालध्वज (14 पहिए) और सुभद्रा का रथ दर्पदलन (12 पहिए) कहलाता है।

बहुडा यात्रा वापसी रथ यात्रा है, जिसमें भगवान गुंडिचा मंदिर से मुख्य जगन्नाथ मंदिर लौटते हैं। 2026 में यह 24 जुलाई को है।

हाँ, रथ यात्रा सबसे समावेशी हिंदू उत्सवों में से एक है। सभी श्रद्धालु रथ की रस्सी खींच सकते हैं और महाप्रसाद ग्रहण कर सकते हैं।

रथ यात्रा 2026 by city

Local रथ यात्रा guides — dates, chariot procession routes, schedules and venues for each city.

Temples celebrating रथ यात्रा

These temples are linked to रथ यात्रा in our directory — ideal for darshan, special pujas, and festival-season visits.

Explore all temples on Temples.bio →