Rama Raksha Stotram — अर्थ सहित संपूर्ण पाठ
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राम रक्षा स्तोत्रम एक भक्ति स्तोत्र है जो भगवान राम को समर्पित है और इसका मुख्य उद्देश्य भक्तों की सुरक्षा और कल्याण करना है।
- Hymn
- Rama Raksha Stotram
- Deity
- Lord Rama
- Number of verses
- 38
- Available languages
- English, Telugu, Hindi
- Last updated
- 18 Jul 2026
Play along to learn the correct pronunciation and rhythm.
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Rama Raksha Stotram के संपूर्ण बोल
📄 Download Hindi PDFVerse 1
चरितं रघुनाथस्य शतकोटि प्रविस्तरम् ।
एकैकमक्षरं पुंसां महापातक नाशनम्
Verse 2
ध्यात्वा नीलोत्पल श्यामं रामं राजीवलोचनम् ।
जानकी लक्ष्मणोपेतं जटामुकुट मंडितम्
Verse 3
सासितूण धनुर्बाण पाणिं नक्तं चरांतकम् ।
स्वलीलया जगत्त्रातु माविर्भूतमजं विभुम्
Verse 4
रामरक्षां पठेत्प्राज्ञः पापघ्नीं सर्वकामदाम् ।
शिरो मे राघवः पातु फालं (भालं) दशरथात्मजः
Verse 5
कौसल्येयो दृशौपातु विश्वामित्रप्रियः शृती ।
घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सलः
Verse 6
जिह्वां विद्यानिधिः पातु कंठं भरतवंदितः ।
स्कंधौ दिव्यायुधः पातु भुजौ भग्नेशकार्मुकः
Verse 7
करौ सीतापतिः पातु हृदयं जामदग्न्यजित् ।
मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जांबवदाश्रयः
Verse 8
सुग्रीवेशः कटिं पातु सक्थिनी हनुमत्-प्रभुः ।
ऊरू रघूत्तमः पातु रक्षःकुल विनाशकृत्
Verse 9
जानुनी सेतुकृत्-पातु जंघे दशमुखांतकः ।
पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः
Verse 10
एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत् ।
स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्
Verse 11
पाताल-भूतल-व्योम-चारिण-श्चद्म-चारिणः ।
न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः
Verse 12
रामेति रामभद्रेति रामचंद्रेति वा स्मरन् ।
नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विंदति
Verse 13
जगज्जैत्रैक मंत्रेण रामनाम्नाभि रक्षितम् ।
यः कंठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः
Verse 14
वज्रपंजर नामेदं यो रामकवचं स्मरेत् ।
अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमंगलम्
Verse 15
आदिष्टवान्-यथा स्वप्ने रामरक्षामिमां हरः ।
तथा लिखितवान्-प्रातः प्रबुद्धौ बुधकौशिकः
Verse 16
आरामः कल्पवृक्षाणां विरामः सकलापदाम् ।
अभिराम-स्त्रिलोकानां रामः श्रीमान् स नः प्रभुः
Verse 17
तरुणौ रूपसंपन्नौ सुकुमारौ महाबलौ ।
पुंडरीक विशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनांबरौ
Verse 18
फलमूलाशिनौ दांतौ तापसौ ब्रह्मचारिणौ ।
पुत्रौ दशरथस्यैतौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ
Verse 19
शरण्यौ सर्वसत्त्वानां श्रेष्ठौ सर्वधनुष्मताम् ।
रक्षःकुल निहंतारौ त्रायेतां नो रघूत्तमौ
Verse 20
आत्त सज्य धनुषा विषुस्पृशा वक्षयाशुग निषंग संगिनौ ।
रक्षणाय मम रामलक्षणावग्रतः पथि सदैव गच्छताम्
Verse 21
सन्नद्धः कवची खड्गी चापबाणधरो युवा ।
गच्छन् मनोरथान्नश्च (मनोरथोऽस्माकं) रामः पातु स लक्ष्मणः
Verse 22
रामो दाशरथि श्शूरो लक्ष्मणानुचरो बली ।
काकुत्सः पुरुषः पूर्णः कौसल्येयो रघूत्तमः
Verse 23
वेदांतवेद्यो यज्ञेशः पुराण पुरुषोत्तमः ।
जानकीवल्लभः श्रीमानप्रमेय पराक्रमः
Verse 24
इत्येतानि जपेन्नित्यं मद्भक्तः श्रद्धयान्वितः ।
अश्वमेधाधिकं पुण्यं संप्राप्नोति न संशयः
Verse 25
रामं दूर्वादल श्यामं पद्माक्षं पीतवाससम् ।
स्तुवंति नामभि-र्दिव्यैर्न ते संसारिणो नराः
Verse 26
रामं लक्ष्मण पूर्वजं रघुवरं सीतापतिं सुंदरम्
काकुत्स्थं करुणार्णवं गुणनिधिं विप्रप्रियं धार्मिकम् ।
राजेंद्रं सत्यसंधं दशरथतनयं श्यामलं शांतमूर्तिम्
वंदे लोकाभिरामं रघुकुल तिलकं राघवं रावणारिम्
Verse 27
रामाय रामभद्राय रामचंद्राय वेधसे ।
रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः
Verse 28
श्रीराम राम रघुनंदन राम राम
श्रीराम राम भरताग्रज राम राम ।
श्रीराम राम रणकर्कश राम राम
श्रीराम राम शरणं भव राम राम
Verse 29
श्रीराम चंद्र चरणौ मनसा स्मरामि
श्रीराम चंद्र चरणौ वचसा गृह्णामि ।
श्रीराम चंद्र चरणौ शिरसा नमामि
श्रीराम चंद्र चरणौ शरणं प्रपद्ये
Verse 30
माता रामो मत्-पिता रामचंद्रः
स्वामी रामो मत्-सखा रामचंद्रः ।
सर्वस्वं मे रामचंद्रो दयालुः
नान्यं जाने नैव जाने न जाने
Verse 31
दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे च (तु) जनकात्मजा ।
पुरतो मारुतिर्यस्य तं वंदे रघुनंदनम्
Verse 32
लोकाभिरामं रणरंगधीरं
राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम् ।
कारुण्यरूपं करुणाकरं तं
श्रीरामचंद्रं शरणं प्रपद्ये
Verse 33
मनोजवं मारुत तुल्य वेगं
जितेंद्रियं बुद्धिमतां वरिष्टम् ।
वातात्मजं वानरयूथ मुख्यं
श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये
Verse 34
कूजंतं रामरामेति मधुरं मधुराक्षरम् ।
आरुह्यकविता शाखां वंदे वाल्मीकि कोकिलम्
Verse 35
आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसंपदाम् ।
लोकाभिरामं श्रीरामं भूयोभूयो नमाम्यहम्
Verse 36
भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसंपदाम् ।
तर्जनं यमदूतानां राम रामेति गर्जनम्
Verse 37
रामो राजमणिः सदा विजयते रामं रमेशं भजे
रामेणाभिहता निशाचरचमू रामाय तस्मै नमः ।
रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोस्म्यहं
रामे चित्तलयः सदा भवतु मे भो राम मामुद्धर
Verse 38
श्रीराम राम रामेति रमे रामे मनोरमे ।
सहस्रनाम तत्तुल्यं राम नाम वरानने
📄 Download PDF — Rama Raksha Stotram
Rama Raksha Stotram का अर्थ क्या है?
राम रक्षा स्तोत्रम का पाठ भक्तों को मानसिक शांति और सुरक्षा प्रदान करता है। यह भगवान राम की कृपा प्राप्त करने का एक माध्यम है और भक्तों को नकारात्मक ऊर्जाओं से बचाता है। यह स्तोत्र जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और आध्यात्मिक विकास को प्रोत्साहित करने में सहायक होता है।
Rama Raksha Stotram की रचना किसने की और यह कहाँ से आई है?
इस स्तोत्र का रचयिता ऋषि बुधकौशिक माने जाते हैं। यह संस्कृत भाषा में लिखा गया है और माना जाता है कि यह प्राचीन काल से ही भक्ति परंपरा का हिस्सा रहा है।
Rama Raksha Stotram का जाप कब और कैसे करें?
राम रक्षा स्तोत्रम का पाठ सोमवार या गुरुवार को शुभ माना जाता है। इसे प्रातःकाल में स्नान के बाद शुद्ध मन से बैठकर किया जाना चाहिए। प्रतिदिन 11 बार पाठ करने से विशेष लाभ होता है। उच्चारण में स्पष्टता और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखें।
❤️ Rama Raksha Stotram के जाप से क्या लाभ होते हैं?
- ✓ भगवान राम की कृपा
- ✓ नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा
- ✓ मानसिक शांति
- ✓ आध्यात्मिक विकास
- ✓ जीवन में सकारात्मक बदलाव
- ✓ भय से मुक्ति