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विवाह मुहूर्त 2027
स्थायी एवं सुखद विवाह के लिए शुभ विवाह तिथियाँ (विवाह / कल्याण मुहूर्त)।
संक्षेप में
2027 में 7 शुभ विवाह तिथियाँ हैं (भारत, IST) — जैसे 2 जनवरी, 4 जनवरी, 23 फ़रवरी, 27 मार्च। नीचे प्रत्येक तिथि का नक्षत्र, तिथि और सुझाई गई मुहूर्त अवधि दी गई है।
2027 में शुभ तिथियाँ
जनवरी 2027
फ़रवरी 2027
मार्च 2027
मई 2027
तिथियाँ पूरे भारत के लिए हैं; दिखाई गई मुहूर्त अवधि हैदराबाद/IST संदर्भ की है और शहर के अनुसार कुछ मिनट बदलती है। अपने परिवार के विवरण के अनुसार सटीक समय पुरोहित से पुष्ट करें।
विवाह मुहूर्त क्या है?
स्थायी एवं सुखद विवाह के लिए शुभ विवाह तिथियाँ (विवाह / कल्याण मुहूर्त)।
विवाह मुहूर्त हिन्दू विवाह के लिए चुना गया शुभ समय है। विवाह जीवनभर का संस्कार है, इसलिए तिथि विशेष सावधानी से — अनुकूल नक्षत्र, शुभ तिथि और वार से — चुनी जाती है ताकि दंपती अनुकूल नक्षत्रों में जीवन आरंभ करें।
वरीय नक्षत्रों में रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढा, उत्तरा भाद्रपदा और रेवती हैं। विवाह पारंपरिक रूप से उत्तरायण में होते हैं और चातुर्मास तथा अमावस्या, भद्रा, व्यतीपात/वैधृति जैसे अशुभ दिनों से बचा जाता है।
नीचे दी गई तिथियाँ भारत (IST) के पंचांग से गणना की गई हैं। अंतिम विवाह मुहूर्त दोनों पक्षों की जन्मकुंडली (गुण मिलान, दोष) को भी तौलता है और पुरोहित से तय करना सर्वोत्तम है।
विवाह मुहूर्त कैसे चुनें
- 1 नीचे दी गई सूची से एक अनुकूल नक्षत्र और शुभ तिथि चुनें।
- 2 भद्रा (विष्टि करण), अमावस्या, रिक्ता तिथि और अशुभ योग (व्यतीपात, वैधृति) टालें।
- 3 चुने हुए दिन के भीतर अभिजित मुहूर्त या अमृत काल जैसी शुभ मुहूर्त अवधि का उपयोग करें।
- 4 सटीक समय अपने परिवार के जन्म विवरण के अनुसार पुरोहित से पुष्ट करें।
How this is calculated
Auspicious dates are selected from the panchang by weighing the nakshatra, tithi, weekday and yoga, and excluding inauspicious periods — Bhadra (Vishti karana), Amavasya, Rikta tithis and yogas such as Vyatipata and Vaidhriti — following classical muhurta guidance (Dharmasindhu / Nirnaya Sindhu). A personal muhurta also weighs your family's birth details; confirm with a priest.
सामान्य प्रश्न
विवाह के लिए कौन-से नक्षत्र शुभ हैं?
रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढा, उत्तरा भाद्रपदा और रेवती विवाह के लिए पारंपरिक रूप से वरीय हैं।
क्या कुछ मासों में विवाह टाले जाते हैं?
हाँ — विवाह सामान्यतः चातुर्मास (जब विष्णु शयन करते हैं), श्रावण, मलमास (अधिक मास) और शुक्र/गुरु अस्त के समय टाले जाते हैं। ये उत्तरायण में होते हैं, अमावस्या, भद्रा और ग्रहण दिवस से बचते हुए।
किन मासों में सबसे अधिक विवाह तिथियाँ होती हैं?
चरम विवाह ऋतुएँ सामान्यतः माघ–फाल्गुन (जन–मार्च), वैशाख–ज्येष्ठ (अप्रैल–जून) और कार्तिक–मार्गशीर्ष (नव–दिस) हैं, बशर्ते उन वर्षों में गुरु और शुक्र दृश्य हों।
विवाह के लिए सर्वोत्तम वार कौन-से हैं?
सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार विवाह के लिए सर्वाधिक शुभ माने जाते हैं; मंगलवार और शनिवार सामान्यतः टाले जाते हैं।
कुंडली मिलान या गुण मिलान क्या है?
गुण मिलान (अष्टकूट) दंपती की कुंडलियों की अनुकूलता 36 अंकों में आँकता है और मंगल (मांगलिक) दोष तथा नाड़ी दोष जैसे दोष जाँचता है। विवाह मुहूर्त इसी मिलान के बाद तय होता है।
क्या बिना मुहूर्त के विवाह हो सकता है?
कानूनी रूप से हाँ (जैसे कोर्ट/रजिस्ट्री विवाह), पर पारंपरिक हिन्दू विवाह मुहूर्त में किया जाता है; जब कोई मुहूर्त उपलब्ध न हो तो कुछ लोग अक्षय तृतीया या बसंत पंचमी जैसे "अबूझ" (स्वयंसिद्ध) दिन चुनते हैं।