व्रत एवं पर्व तिथियाँ · भारत · IST
प्रदोष 2026
इस वर्ष की सभी प्रदोष (त्रयोदशी) तिथियाँ — भगवान शिव को समर्पित गोधूलि व्रत।
आगामी प्रदोष: बुधवार, 9 सितंबर
संक्षेप में
इस वर्ष 2026 में 6 प्रदोष तिथियाँ हैं (भारत, IST), और अगली बुधवार, 9 सितंबर। पूरी सूची नीचे है — किसी भी तिथि पर टैप करके उस दिन का पंचांग देखें।
प्रदोष · 2026
जून 2026
जुलाई 2026
अगस्त 2026
सितंबर 2026
भारत (IST · हैदराबाद संदर्भ) के पंचांग से गणना। तिथि के किसी सूर्योदय पर फैलने या छूटने पर क्षेत्रीय पंचांग कभी-कभी एक दिन भिन्न हो सकता है।
प्रदोष क्या है?
इस वर्ष की सभी प्रदोष (त्रयोदशी) तिथियाँ — भगवान शिव को समर्पित गोधूलि व्रत।
प्रदोष (प्रदोष व्रत) प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी को पड़ता है — माह में लगभग दो बार — और भगवान शिव को समर्पित है। व्रत प्रदोष काल में, सूर्यास्त के आसपास की गोधूलि अवधि में मनाया जाता है।
प्रदोष अपने वार से नामित होता है — शनि प्रदोष (शनिवार), सोम प्रदोष (सोमवार), भौम प्रदोष (मंगलवार) — प्रत्येक का अपना महत्व है। भक्तजन उपवास रखते हैं और सूर्यास्त के समय शिव का अभिषेक करते हैं।
नीचे दी गई तिथियाँ भारत (IST) के पंचांग से गणना की गई हैं। किसी भी तिथि पर टैप करके उस दिन का पूरा पंचांग और प्रदोष काल देखें।
प्रदोष कैसे मनाएँ
- 1 व्रत के दिन प्रातः जल्दी उठें, स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
- 2 दिनभर व्रत का पालन करें — जहाँ निर्धारित हो वहाँ अन्न से बचते हुए।
- 3 इष्ट देवता की पूजा और प्रार्थना करें, जप और व्रत कथा के पाठ सहित।
- 4 निर्धारित समय पर व्रत का पारण करें — सटीक अवधि के लिए उस दिन का पंचांग देखें।
How this is calculated
Timings are computed with the Drik (observational) method using the Lahiri (Chitra-paksha) ayanamsha, for India (IST) with Hyderabad as the reference location. Sunrise- and sunset-based windows — Rahu Kalam, Choghadiya and the muhurtas — are derived from the day's actual sunrise and sunset, so they shift a few minutes by city.
सामान्य प्रश्न
प्रदोष कब मनाया जाता है?
त्रयोदशी (13वीं तिथि) को, माह में लगभग दो बार, प्रदोष काल में — सूर्यास्त के आसपास लगभग 1.5 घंटे की गोधूलि अवधि। सटीक प्रदोष काल के लिए तिथि पर टैप करें।
प्रदोष पर किसकी पूजा होती है?
भगवान शिव, नंदी और पार्वती। भक्तजन प्रदोष काल में शिवलिंग का अभिषेक करते हैं और प्रदोष व्रत कथा पढ़ते हैं।
शनि प्रदोष क्या है?
शनिवार को पड़ने वाला प्रदोष। इसे शनि-दोष और साढ़ेसाती से राहत के लिए विशेष प्रभावशाली माना जाता है।
सोम और भौम प्रदोष क्या हैं?
सोम प्रदोष सोमवार को पड़ता है और इच्छापूर्ति के लिए; भौम (मंगल) प्रदोष मंगलवार को पड़ता है और आरोग्य एवं ऋण-मुक्ति के लिए मनाया जाता है।
प्रदोष व्रत के क्या लाभ हैं?
माना जाता है कि यह पापों का नाश करता है और आरोग्य, समृद्धि तथा संतान देता है — प्रदोष की गोधूलि वेला में शिव सर्वाधिक प्रसन्न माने जाते हैं।
एक वर्ष में कितने प्रदोष होते हैं?
लगभग 24 — प्रत्येक चंद्र मास के दोनों पक्षों में एक-एक (माह में दो)।