Book Karthika Masam Panchatatva Deeparadhana · ₹999 for 30 Days
English हिन्दी

व्रत एवं पर्व तिथियाँ · भारत · IST

प्रदोष 2026

इस वर्ष की सभी प्रदोष (त्रयोदशी) तिथियाँ — भगवान शिव को समर्पित गोधूलि व्रत।

आगामी प्रदोष: शनिवार, 24 अक्टूबर

संक्षेप में

इस वर्ष 2026 में 24 प्रदोष तिथियाँ हैं (भारत, IST), और अगली शनिवार, 24 अक्टूबर। पूरी सूची नीचे है — किसी भी तिथि पर टैप करके उस दिन का पंचांग देखें।

प्रदोष · 2026

जनवरी 2026

गुरुवार, 1 जनवरी
Vaikunta Ekadasi · शुक्ल पक्ष · रोहिणी
शुक्रवार, 16 जनवरी
कृष्ण पक्ष · मूल
शनिवार, 31 जनवरी
शुक्ल पक्ष · पुनर्वसु

फ़रवरी 2026

रविवार, 15 फ़रवरी
Maha Shivaratri · कृष्ण पक्ष · उत्तराषाढ़ा

मार्च 2026

रविवार, 1 मार्च
शुक्ल पक्ष · पुष्य
मंगलवार, 17 मार्च
कृष्ण पक्ष · धनिष्ठा
मंगलवार, 31 मार्च
Mahavir Jayanti · शुक्ल पक्ष · पूर्वा फाल्गुनी

अप्रैल 2026

बुधवार, 15 अप्रैल
Vishu Vishu Kani · कृष्ण पक्ष · पूर्वा भाद्रपदा
बुधवार, 29 अप्रैल
शुक्ल पक्ष · हस्त

मई 2026

शुक्रवार, 15 मई
Vrishabha Sankranti · कृष्ण पक्ष · अश्विनी
शुक्रवार, 29 मई
शुक्ल पक्ष · स्वाति

जून 2026

शनिवार, 13 जून
कृष्ण पक्ष · कृत्तिका
शनिवार, 27 जून
Pradosh Vrat Pradosham Days · शुक्ल पक्ष · अनुराधा

जुलाई 2026

रविवार, 12 जुलाई
Bonalu · कृष्ण पक्ष · रोहिणी
सोमवार, 27 जुलाई
Shravan Somavar · शुक्ल पक्ष · मूल

अगस्त 2026

बुधवार, 26 अगस्त
Onam · शुक्ल पक्ष · श्रवण

सितंबर 2026

बुधवार, 9 सितंबर
कृष्ण पक्ष · आश्लेषा
गुरुवार, 24 सितंबर
शुक्ल पक्ष · धनिष्ठा

अक्टूबर 2026

गुरुवार, 8 अक्टूबर
Guru Pradosha · कृष्ण पक्ष · पूर्वा फाल्गुनी
शनिवार, 24 अक्टूबर आगामी
शुक्ल पक्ष · उत्तरा भाद्रपदा

नवंबर 2026

शनिवार, 7 नवंबर
Narak Chaturdashi · कृष्ण पक्ष · चित्रा
रविवार, 22 नवंबर
शुक्ल पक्ष · अश्विनी

दिसंबर 2026

रविवार, 6 दिसंबर
Ravi Pradosha · कृष्ण पक्ष · स्वाति
मंगलवार, 22 दिसंबर
Winter Solstice · शुक्ल पक्ष · कृत्तिका

भारत (IST · हैदराबाद संदर्भ) के पंचांग से गणना। तिथि के किसी सूर्योदय पर फैलने या छूटने पर क्षेत्रीय पंचांग कभी-कभी एक दिन भिन्न हो सकता है।

प्रदोष क्या है?

इस वर्ष की सभी प्रदोष (त्रयोदशी) तिथियाँ — भगवान शिव को समर्पित गोधूलि व्रत।

प्रदोष (प्रदोष व्रत) प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी को पड़ता है — माह में लगभग दो बार — और भगवान शिव को समर्पित है। व्रत प्रदोष काल में, सूर्यास्त के आसपास की गोधूलि अवधि में मनाया जाता है।

प्रदोष अपने वार से नामित होता है — शनि प्रदोष (शनिवार), सोम प्रदोष (सोमवार), भौम प्रदोष (मंगलवार) — प्रत्येक का अपना महत्व है। भक्तजन उपवास रखते हैं और सूर्यास्त के समय शिव का अभिषेक करते हैं।

नीचे दी गई तिथियाँ भारत (IST) के पंचांग से गणना की गई हैं। किसी भी तिथि पर टैप करके उस दिन का पूरा पंचांग और प्रदोष काल देखें।

प्रदोष कैसे मनाएँ

  1. 1 व्रत के दिन प्रातः जल्दी उठें, स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
  2. 2 दिनभर व्रत का पालन करें — जहाँ निर्धारित हो वहाँ अन्न से बचते हुए।
  3. 3 इष्ट देवता की पूजा और प्रार्थना करें, जप और व्रत कथा के पाठ सहित।
  4. 4 निर्धारित समय पर व्रत का पारण करें — सटीक अवधि के लिए उस दिन का पंचांग देखें।

How this is calculated

Timings are computed with the Drik (observational) method using the Lahiri (Chitra-paksha) ayanamsha, for India (IST) with Hyderabad as the reference location. Sunrise- and sunset-based windows — Rahu Kalam, Choghadiya and the muhurtas — are derived from the day's actual sunrise and sunset, so they shift a few minutes by city.

Reviewed by Thanuja, Astrologer (6+ yrs) Lahiri ayanamsha · Drik method · India/IST

सामान्य प्रश्न

प्रदोष कब मनाया जाता है?

त्रयोदशी (13वीं तिथि) को, माह में लगभग दो बार, प्रदोष काल में — सूर्यास्त के आसपास लगभग 1.5 घंटे की गोधूलि अवधि। सटीक प्रदोष काल के लिए तिथि पर टैप करें।

प्रदोष पर किसकी पूजा होती है?

भगवान शिव, नंदी और पार्वती। भक्तजन प्रदोष काल में शिवलिंग का अभिषेक करते हैं और प्रदोष व्रत कथा पढ़ते हैं।

शनि प्रदोष क्या है?

शनिवार को पड़ने वाला प्रदोष। इसे शनि-दोष और साढ़ेसाती से राहत के लिए विशेष प्रभावशाली माना जाता है।

सोम और भौम प्रदोष क्या हैं?

सोम प्रदोष सोमवार को पड़ता है और इच्छापूर्ति के लिए; भौम (मंगल) प्रदोष मंगलवार को पड़ता है और आरोग्य एवं ऋण-मुक्ति के लिए मनाया जाता है।

प्रदोष व्रत के क्या लाभ हैं?

माना जाता है कि यह पापों का नाश करता है और आरोग्य, समृद्धि तथा संतान देता है — प्रदोष की गोधूलि वेला में शिव सर्वाधिक प्रसन्न माने जाते हैं।

एक वर्ष में कितने प्रदोष होते हैं?

लगभग 24 — प्रत्येक चंद्र मास के दोनों पक्षों में एक-एक (माह में दो)।

Subramanya Abhishekam
Karthika Masam Panchatatva Deeparadhana